
किच्छा। बेहिसाब अवैध खनन करने से जल जंगल जमीन का अस्तित्व ही समाप्त होने की तरफ है! लीज प्लाटों की आड में मिलीभगत के चलते नदी के साथ ही जंगल भी खोद डाले हैं जिससे आने वाले समय में किच्छा में बाढ़ का खतरा और बढ़ रहा है।

लोगों का कहना है बेहिसाब ओवरलोड वाहनों से रात दिन अवैध खनन की ढुलाई की जा रही है और इसमें अधिकारी वर्ग भी कहीं न कहीं लिप्त नजर आता है!
लालकुआ विधानसभा क्षेत्र के विधायक (पूर्व) नवीन दुम्का ने कहा है पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जो आवाज लोकसभा में उठाई है उसका असली रूप धरातल पर नजर आ रहा है।

किच्छा में आज हमारे प्रतिनिधि ने कई लीज प्लाटों का भ्रमण किया तो देखा कि अवैध खनन के साथ ही जंगल से लकड़ी भी तस्कर ले जा रहे हैं और कई स्थानों पर आरक्षित वन भूमि में जे सी बी से खुदान हो रहा है।
बताते चलें केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से खनन की अनुमति नहीं चुगान की अनुमति मिलती है और नदी में जे सी बी किसी भी सूरत में खनन नहीं कर सकती! लेकिन यहां पोकलैंड मशीनों से बेहिसाब ओवरलोड वाहनों से खनन संपदा की खुलेआम चोरी हो रही है सभी नियम कानून जिला प्रशासन की नाक तले दम तोड़ रहे है लेकिन कोई अधिकारी इस तरफ देखने को राजी नहीं है!

पट्टे की आड में जहां मन करे वहां खोदा जाना किस नियम का हिस्सा है ये सरकार और न्याय प्रणाली को सोचना होगा! उत्तराखंड में हो रहे अवैध खनन पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेना होगा वरना जल जंगल जमीन को बचा पाना मुश्किल होगा।















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