नई दिल्ली। संसद ने भारत ने वक्फ बिल की धारा 40 को इतिहास बना दिया है, जिससे अब किसी भी संपत्ति को मनमाने ढंग से वक्फ संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकेगा।
यह धारा वक्फ बोर्ड को यह तय करने का अधिकार देती थी कि कोई संपत्ति वक्फ संपत्ति है या नहीं। सरकार का कहना है कि इस धारा का दुरुपयोग होता था, जिससे कानूनी लड़ाई-झगड़े होते थे।
.वक्फ संशोधन विधेयक 2025 में इस धारा को हटाने का प्रावधान है, जिससे वक्फ बोर्ड की मनमानी पर रोक लगेगी। अब किसी भी जमीन को वक्फ घोषित करने के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी. सरकार का मकसद वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन करना और पारदर्शिता लाना है।
लेकिन विपक्ष इसका विरोध कर रहा है.विपक्ष का कहना है कि यह बिल वक्फ बोर्ड और मुसलमानों के अधिकारों को छीनने के लिए लाया गया है। वहीं, सरकार का कहना है कि इसका मकसद किसी धर्म में हस्तक्षेप करना नहीं है, बल्कि संपत्तियों का प्रबंधन सुधारना है।
.वक्फ बोर्ड के पास देशभर में लगभग 8 लाख 70 हजार संपत्तियां हैं, जो करीब 9 लाख 40 हजार एकड़ जमीन पर फैली हुई हैं और इनकी अनुमानित कीमत 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपये है. यह दुनिया में सबसे ज्यादा वक्फ संपत्ति है।वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने विरोध किया है।
जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें विधेयक की प्रति देर से मिली, जिससे उन्हें समीक्षा के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला.सरकार के अनुसार, इस संशोधन से वक्फ कानूनों का दुरुपयोग रोका जाएगा और संपत्तियों का निष्पक्ष प्रशासन हो सकेगा. लेकिन विपक्ष इसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ मानता है।
वक्फ बिल पर हो रही चर्चा के दौरान, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस बिल से मुस्लिम समुदाय की जमीन नहीं छीनी जाएगी, बल्कि इसका मकसद संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन करना है.।
इस पूरे मामले में सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार जुबानी जंग देखने को मिल रही है, जहां सरकार को विपक्ष के साथ-साथ मुस्लिम संगठनों का भी विरोध झेलना पड़ रहा है।















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