

देहरादून। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सूबे के मुख्य सचिव को तलब किया है, जानकारी के अनुसार नई दिल्ली स्थित 06 महीने का भरोसा, फिर भी जमीनी काम शून्य की प्रधान पीठ ने हरिद्वार के कनखल स्थित बेलीराम आश्रम क्षेत्र में गंगा की फ्लड प्लेन में हुए निर्माण कार्य और उससे जुड़े प्रदूषण के मामले की सुनवाई करते हुए यह सख्त आदेश पारित किया।
न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल की पीठ ने स्पष्ट किया कि गंगा की फ्लड प्लेन का सीमांकन 1:100 वर्ष की अधिकतम बाढ़ सीमा को आधार बनाकर किया जाना कानूनन अनिवार्य है।
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि गंगा पुनर्जीवन, संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण आदेश-2016 के तहत गंगा और उसकी सहायक नदियों के अंतर्गत आने वाले अन्य राज्यों में फ्लड प्लेन का सीमांकन 1 मीटर कंटूर के आधार पर किया जा रहा है, जबकि उत्तराखंड में अब तक 10 मीटर कंटूर अपनाया गया, जिससे वास्तविक बाढ़ क्षेत्र संकुचित हो गया।
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NIH), रुड़की के वैज्ञानिक एके लोहानी ने ट्रिब्यूनल को बताया कि वर्ष 2016 में 1 मीटर कंटूर डेटा उपलब्ध नहीं था, लेकिन अब यह उपलब्ध है और अधिक सटीक है।
उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक आंकड़े मौजूद हैं और 1 मीटर कंटूर के आधार पर सीमांकन एक से दो महीने में पूरा किया जा सकता है।
एनजीटी ने रिकॉर्ड पर लिया कि 18 अगस्त 2025 को उत्तराखंड सरकार ने ट्रिब्यूनल को बताया था कि छह माह में फ्लड प्लेन का सीमांकन पूरा कर लिया जाएगा।
इसके बावजूद 13 नवंबर 2025 की सुनवाई में स्वीकार किया गया कि कोई प्रगति नहीं हुई। बाद में सिंचाई विभाग, हरिद्वार के अधिशासी अभियंता ओमजी गुप्ता ने फंड की कमी का हवाला दिया, जिस पर एनजीटी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
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