

जब से अमेरिका के राष्ट्रपति ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को पत्नी सहित उठवाकर अमेरिका की जेल में डाला है तबसे सारी दुनिया के नेताओं में हड़कंप मचा हुआ है, सबको खुद की और पत्नी की चिंता हो रही होगी लेकिन भारत के नेता निश्चिंत हैं। हमें कोई फर्क़ नहीं पड़ता,हमारे यहां तो कुंवारों की सरकारें हैं।
हमारे प्रधानमंत्री आज भी दहाड़ रहे हैं,हमारे यहां तो विपक्ष के नेता भी कुंवारे मिल जायेंगे और कई मुख्यमंत्री भी फिर भूरा भाई से कौन डरेगा ?
वैसे भी वेनेजुएला का मामला थोड़ा अलग है, सबसे ज्यादा मिस वर्ल्ड देने वाला देश है वो। वहां की महिलाएं सबसे सुंदर मानी जाती हैं यह बात भूरा भाई जानते हैं लेकिन राष्ट्रपति की पत्नी भी सबसे खूबसूरत हो यह जरूरी तो नहीं लेकिन अपने भूरा भाई को कौन समझाये ? और वो समझते भी कब हैं ?
किसी ने उन्हें समझाने की ठान भी ली तो भी कोई फायदा नहीं। वो उसकी खुन्नस किसी और पर निकालने लगते हैं, पिछले साल यूक्रेन वाले ने बहुत अच्छे से समझाया था भूरा भाई को लेकिन उसके बाद ही भूरा भाई बहुत फ्रस्ट्रेशन में आ गए थे, शायद उसी का बदला उन्होंने वेनेजुएला से लिया है, ताकि फिर कोई उन्हें समझाने की न सोचे।
यही बात जब हमने हमारे बेधड़क भोपाली को समझाई तो बेधड़क ने बड़ा वाजिब सा सवाल किया, बेधड़क बोले कि मियां भूरा भाई को जब हड़काया यूक्रेन वाले ने था फिर उठाया वेनेजुएला वाले को क्यूँ ? यूक्रेन वाले को ही उठाना था न ? तब हमने भी बेधड़क से दो वाजिब सवाल पूछे, हमने पूछा चचा कभी पागलखाने गए हो ?
चचा बोले हाँ तो हमने फिर पूछा कि वहां एक पागल को किसी दूसरे पागल से डरते हुए देखा है ? तो चचा बोले बिल्कुल नहीं, हमने तो सिर्फ नॉर्मल आदमी को ही पागल से डरते देखा है, पागल को पागल से डरते हुए नहीं देखा।
तब हमने समझाया कि चचा यहां भी तकरीबन मामला ऐसा ही है। जब सामने वाला अपनी टक्कर का हो फिर किसी को भी चक्कर आ जाता है इसलिए भूरा भाई यूक्रेन वाले से अब उतना ही दूर रहते हैं जितना नई पेंट वाले बाबू साब केले के छिलके से।
भूरा भाई जानते हैं अभी तक पुराना दाग मिटा नहीं है फिर नया दाग लगवाने से क्या फायदा ? और वैसे भी यूक्रेन वाले की हालत तो उस नंगे जैसी हो गई है जिससे खुदा भी डरता है, उसके पास तो अब खोने के लिए कुछ बचा ही नहीं और फिर जब वो भूरा भाई के दादा भाई से नहीं डरा तो भूरा भाई से क्या डरेगा ?
और कहीं यूक्रेन वाले को उठवाकर अमेरिका ले भी आए तो खतरा और ज्यादा बढ़ जायेगा, कहीं उसे ढूंढते हुए दादा भाई भी अमेरिका तक आ गए तो कि होगा पापे ?
इसलिए वेनेजुएला ही ठीक लगा, अब भूरा भाई कम से कम कोई डील तो कर सकते हैं कि तुम हमें तेल दो हम तुम्हें बेल देंगे या फिर कोई और लेकिन फिर भी सवाल यह है कि तेल ही चाहिए था तो तेल निकाल देते राष्ट्रपति को उठवाने की क्या जरूरत थी ? वो भी भौजी के साथ ?
तो इसका जवाब सिर्फ भूरा भाई ही दे सकते हैं क्योंकि दुनिया कुछ नेता ऐसे होते हैं जिनका अगला कदम क्या होगा यह वह खुद भी नहीं जानते, इस मामले में पहले नंबर पर हैं भूरा भाई और दूसरे नंबर पर हैं हमारे विपक्ष के नेता।
हमारे विपक्ष के नेता भी कब क्या कर दें कोई नहीं जान पाया,अचानक आंख मार दें, अचानक प्रधानमन्त्री के गले पड जाएँ या फिर अचानक ही किसी की झप्पी पप्पी ले लें कोई ठिकाना नहीं।
हमारे विपक्ष के नेता की भी क्या कहें। आजकल राजनीति में ट्रेंड ही ऐसा चल पड़ा है काम कुछ करो या मत करो पर धमाका जरूर करो! जिससे पूरी दुनिया में हलचल मच जाये इसीलिए सारे नेता कुछ ना कुछ ऊल जुलूल करते रहते हैं। प्रतिस्पर्धा का स्तर गिरता जा रहा है!
आज मीडिया का ज़माना है और मीडिया को किसी विकास पुरूष की जरूरत तो है नहीं, उन्हें तो चाहिए एकदम विदूषक जिसकी हरकत एकदम वायरल हो जाये इसलिए नेता और मीडिया एक दूसरे का ध्यान रखते हैं, मीडिया विकास के बजाए यह ज्यादा दिखाता है कि नेता किसको चूम रहा है,किसके साथ घूम रहा है।
यही दिखाने के लिए कैमरा लेकर घूमते रहते हैं और कैमरे में आने के लिए नेता झूमते रहते हैं। अब देखते हैं भूरा भाई क्या करते हैं ? सहयोग: विनायक फीचर्स
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