

बिंदुखत्ता। लालकुआं विधानसभा क्षेत्र: राजस्व गांव घोषित करने की मांग अब जन जन की मांग हो गई है! राजस्व गांव घोषित करने की मुहिम विधायक डॉ मोहन बिष्ट ने शुरु की थी! उन्होंने राजस्व गांव के लिए जोरदार प्रयास किए! लेकिन अचानक उनकी और जनता की दूरी कैसे बढ़ गई ?
राजस्व गांव के लिए वनाधिकार संगठन बिंदुखत्ता बनाया गया और विधायक की अध्यक्षता में तीन बैठक ठीक ठाक हुई! इसके बाद न उस तरह सबको बुलाकर बैठक ही हुई और न विधायक और संगठन की ओर से पहल हुई!
संगठन ने बहुत मेहनत की और सारे प्रमाण एकत्र कर संवैधानिक रुप से राजस्व गांव घोषित करने की मांग शुरु की! इसके बाद कई विपक्षी सदस्य इस मांग को विधानसभा में उठाते हैं लेकिन स्थानीय विधायक चुप्पी साध जाते हैं!
इसके बाद संगठन असहज हो गया और वह जनता के बीच चाय पर चर्चा करने लगा! जनप्रतिनिधि फिर भी इस मांग के प्रति गंभीर नहीं दिखे तो संगठन ने पंद्रह अगस्त से जनजागरण अभियान शुरू कर दिया जो वर्तमान में भी जारी है!
इस जनजागरण रैली का स्वरूप स्वतः स्फूर्त आंदोलन जैसा दिख रहा है! इसके बीच विधायक डॉ मोहन बिष्ट आंदोलनकारियों पर उपनामों की बौछार करते हैं जो आंदोलन को और धार दे रहे हैं! विधायक और जनता के बीच बढ़ती दूरी और सीएम पुष्कर धामी के प्रति आशावान जनता अब 27 सितंबर को लालकुआं में विशाल प्रदर्शन कर सरकार से अविलंब राजस्व गांव और नदी किनारे तटबंध बनाने की मांग करेगी।
आंदोलन की अगुवाई कर रहे संगठन के संरक्षक कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, अध्यक्ष उमेश भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी सहित पूरी कोर कमेटी ने कहा है जनता को आजादी के बाद से अब तक छला जाता रहा है इससे जनता के मौलिक अधिकारों की हत्या हुई है।
इसलिए जनता अब मुख्यमंत्री पुष्कर धामी सरकार से मांग कर रही है कि बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की अधिसूचना जारी की जाए। लोग मुख्यमंत्री से उम्मीद लगाए हैं कि वह उनकी मांग अविलंब पूरी करेंगे। विधायक डॉ मोहन बिष्ट चुनाव पूर्व अधिसूचना जारी करवाने में कामयाब होते हैं तो वह जमीनी नेता के रूप में स्थापित हो सकते हैं।
लोगों की उम्मीद पर जन प्रतिनिधि कितना खरा उतरता है ये उसकी कार्यशैली/वॉक पट्टूता पर निर्भर करता है! सियासत में जिह्वा के बहुत बड़ा महत्व है! इस मामले में सूबे के मुखिया युवा नेता सीएम पुष्कर धामी का कोई जवाब नहीं है! कहावत है बनिया गुड़ न दे सिर्फ मीठी बात से खुश कर दे तो लोग बनिये से नाराज नहीं होते !फिर फिर उसी की दुकान जाते हैं!
अब तक के कार्यकाल में सरस्वती का साथ रहना भी जिह्वा को नियंत्रण में रखने से कहीं अधिक तब है जब हमारी सोच में सकारात्मकता भरी होगी!
एक सोच ही है जो इंसान को सही और गलत दोनों मार्ग दिखाती है लेकिन निर्णय स्वयं करना है कि जाना किधर है! आत्मा सत्य और गलत का एहसास करवा देती है! समाज की जिसने ईमानदारी से सेवा की और पारदर्शिता से काम किया वह समाज का फिर से दिल जीत लेता है!
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