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ब्रेकिंग न्यूज: #वनाधिकार संगठन# ने विधायक #डॉ मोहन बिष्ट# को लपेटा#! पढ़ें ✓क्या लगाए हैं आरोप…

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लालकुआं विधानसभा क्षेत्र अपडेट: जहां एक ओर उत्तराखंड सरकार ने राजस्व गांव घोषित करने वाला बयान दिया है वहीं राजस्व ग्राम बनाने की मांग तेज हो गई है।

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मिले प्रेस बयान के अनुसार दो स्थानों पर हुई ‘चाय पर चर्चा’ वनाधिकार संगठन बिंदुखत्ता के तत्वावधान में रविवार को विकासपुरी (इंद्रानगर प्रथम) एवं तिवारीनगर (टूटी पुलिया) में “चाय पर चर्चा” कार्यक्रम आयोजित किए गए।

दोनों स्थानों पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेते हुए बिंदुखत्ता को वनाधिकार अधिनियम, 2006 के तहत राजस्व ग्राम घोषित किए जाने की मांग दोहराई।बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक बिंदुखत्ता के राजस्व ग्राम के मुद्दे की प्रभावी पैरवी करने में विफल रहे हैं।

उनका कहना था कि जनता के समक्ष वनाधिकार अधिनियम के स्पष्ट प्रावधानों के बजाय निर्वनीकरण की प्रक्रिया को समाधान के रूप में प्रस्तुत कर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है, जबकि यह रास्ता वर्षों से निष्प्रभावी साबित हुआ है।

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वक्ताओं ने कहा कि वनाधिकार अधिनियम, 2006 के लागू होने के बाद देशभर में 1,700 से अधिक गांवों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित किया जा चुका है तथा 2 करोड़ 38 लाख एकड़ से अधिक भूमि पर वनवासियों एवं अन्य परंपरागत वन निवासियों को वैधानिक अधिकार प्रदान किए जा चुके हैं।

ऐसे में यह अत्यंत चिंताजनक है कि उत्तराखंड में आज तक इस कानून के तहत एक भी गांव को राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिल सका।ग्रामीणों ने कहा कि बिंदुखत्ता के सामुदायिक वनाधिकार दावे को जिला स्तरीय समिति पहले ही स्वीकृति देकर राज्य सरकार को अग्रेषित कर चुकी है।

अब सरकार को बिना किसी अनावश्यक विलंब के वनाधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप अधिसूचना जारी कर बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करना चाहिए।बैठक में यह भी कहा गया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने भी निर्वनीकरण की प्रक्रिया अपनाकर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजे थे, लेकिन वर्षों तक कोई परिणाम नहीं निकला।

इसलिए अब उसी असफल प्रक्रिया को दोहराने के बजाय वनाधिकार अधिनियम के तहत उपलब्ध वैधानिक व्यवस्था को लागू करना ही बिंदुखत्ता की जनता के हित में होगा।

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कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि बिंदुखत्ता के लोग अपने संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक हैं और जब तक वनाधिकार अधिनियम के तहत राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक जनजागरण और जनसंपर्क अभियान लगातार जारी रहेगा।

वनाधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश भट्ट, सचिव एडवोकेट बलवंत बिष्ट, उपाध्यक्ष भरत नेगी,पूर्व जिला पंचायत सदस्य कमलेश चंदोला, नंदन बोरा,पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष सूबेदार मेजर खिलाफ सिंह दानू, कैप्टेन चंचल सिंह कोरंगा, कैप्टेन इंद्र सिंह पनेरी, कैप्टेन दलबीर सिंह कफोला, डॉ चंद्र सिंह दानू, सूबेदार मेजर हीरा सिंह बिष्ट, प्रोफेसर आर सी पुरोहित, दीपक नेगी, भूपेश जोशी, भगत सिंह बिष्ट, लकी जोशी, आन सिंह धामी, कमल मिश्रा, बिशन बोरा, तारा दत्त जोशी, रमेश गोस्वामी सहित सैकड़ों की संख्या में महिलाओं एवं बच्चों की भी उपस्थिति रही।

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