

रामनगर। राज्य परिवहन प्राधिकरण, उत्तराखंड द्वारा राज्य में संचालित स्कूल बसों एवं स्कूल वैन हेतु किराया निर्धारण संबंधी आदेश पारित किया गया है, जिसके अंतर्गत 1 से 10 किलोमीटर दूरी के लिए 2200 रुपये परिवहन शुल्क निर्धारित किया गया है।
उक्त निर्णय समिति की संस्तुति पर आधारित बताया गया है, तथापि यह आदेश अभिभावकों एवं आमजनमानस पर प्रतिकूल आर्थिक प्रभाव डालने वाला प्रतीत होता है।
रामनगर परामर्श विधि परिवार और हाईकोर्ट अधिवक्ता पूरन पांडे ने इस निर्णय पर गंभीर आपत्ति व्यक्त करते हुए इसे मनमाना एवं अव्यवहारिक करार दिया है।
उनका मत है कि बिना व्यापक जनसुनवाई एवं हितधारकों से समुचित परामर्श के इस प्रकार का शुल्क निर्धारण प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
रामनगर परामर्श विधि परिवार और हाईकोर्ट अधिवक्ता मनु अग्रवाल ने बताया की निर्णय अभिभावकों के संवैधानिक अधिकारों, विशेषकर समानता एवं न्यायसंगत व्यवहार के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है। अतः इस विषय में पुनर्विचार अपेक्षित है।
परामर्श विधि परिवार ने यह भी सूचित किया है कि शीघ्र ही एक अभिभावक संघ का गठन किया जाएगा तथा संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष इस विषय को विधिक एवं प्रशासनिक स्तर पर प्रस्तुत कर उचित समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे आमजन पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
विरोध दर्ज कराने मे अधिवक्ता मनोज बिष्ट, फ़िरोज़ अंसारी, भूपाल रावत, गौरब गोला ने आपति दर्ज की।
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