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*मां नंदा सुनंदा* मेले का विशाल कलश यात्रा के साथ शुभारंभ! पढ़ें ऐतिहासिक *तीन मंदिर रावतनगर बिन्दुखत्ता* मेले की तैयारी अपडेट…

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बिंदुखत्ता(नैनीताल) (प्रधान संपादक जीवन जोशी) यहां हिमालय की कंदराओं से ब्रह्म कमल लेकर आए भक्तों के स्वागत में परम्परागत रूप से विशाल कलश यात्रा का हर साल की तरह आयोजन किया गया, यह कलश यात्रा प्रातः मंदिर से प्रारंभ होकर रावत नगर शिव मंदिर पहुंची।

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कलश यात्रा रावतनगर पूर्व पश्चिम बिंदुखत्ता भ्रमण करते हुए पुनः मंदिर पूजा स्थल पहुंची। सैकड़ों महिला इस कलश यात्रा में नंगे पैर कई किलोमीटर चलकर मंदिर पहुंची। इस यात्रा में अमेरिका से आई नहीं कलाकार ने अपनी कला से सबको आश्चर्यचकित कर दिया! इस अवसर पर आज शनिवार को मंदिर में नंदा सुनंदा मेले की विधिवत पूजा अर्चना प्रारंभ कर दी गई है।

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रात्रि में ऐतिहासिक मेला होगा क्योंकि इस साल आठों का नंदाष्टमी मेला है! इस अवसर पर मंदिर में उत्तराखंड की संस्कृति का आगाज भी देखने को मिला! जहां एक ओर पूजा अर्चना चल रही थी तो दूसरी ओर मंदिर में झोड़ा चांचरी गाते लोगों का अपना ही मिजाज था!

पहाड़ की संस्कृति को संजोए रखने वाला यह प्राचीन मेला तराई भाबर में अजूबा मेला होता है जहां हजारों की भीड़ जुटती है! विदेश से भी लोग इस मेले के लिए घर आते हैं!

मेले में हजारों लोगों द्वारा अपने अपने रिवाज के अनुसार झोड़ा चांचरी का गायन पूरी रात (शनिवार) होगा। सुबह मां नंदा सुनंदा मेले का विशाल भंडारे के साथ समापन होगा।

इधर मंदिर कमेटी ने हमारे प्रतिनिधि को अपना दुखड़ा सुनाया और कहा इस वर्ष मेले की भूमि पर जबरदस्त भू कटाव हुआ है जो मंदिर के लिए संकट से कम नहीं है इसलिए तत्काल मंदिर बचाने के लिए सुरक्षा के सरकारी प्रयास की दरकार है।

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मंदिर कमेटी के मोहन सिंह मेहता ने कहा है हर साल ये दो दिन का मेला उत्तराखंड की संस्कृति को बचाने और मां भगवती की आराधना का अवसर प्रदान करता है इसे संरक्षित करने के लिए युवाओं को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

इस मेले में कुमाऊं गढ़वाल की सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने वाले कलाकारों का संगम भी होता है! दूरदराज से लोग यहां आकर मां नंदा सुनंदा मेले का महत्व समझते हैं और भरपूर कला का प्रदर्शन करते हैं।

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