

भारत वह देश है जहां राम रावण युद्ध और कौरव पांडव युद्ध हुआ और जीत सदा सत्य की हुई है! भारत माता उसे कभी गलत सजा नहीं देती है जो सत्य की राह पर चलेगा! और जिसने भी यहाँ अहंकार किया उसका पतन निश्चित हुआ है! पश्चिम बंगाल में कभी ज्योति बसु का एक किला था और उसे भेदना आसान नहीं था!
लेकिन हुआ यह कि वहां भी पूँजीवाद ने पाँव पसारे और ममता बनर्जी के रूप में पूंजीवादी का जन्म हुआ! कांग्रेस को भी उदाहरण के रूप में लिया जाए! भ्रष्टाचार और सामाजिक संतुलन बना पाने में विफल होना और एक तरफा हो जाना कांग्रेस को रसातल में ले गया!
वर्तमान में केंद्र सरकार को चाहिए कि वह दमन करने की कोशिश न करे क्योंकि विपक्षी दल के लिए ये किसी संजीवनी से कम नहीं होगा! किसी एक व्यक्ति के स्थान छोड़ने से संकट टल जाता है तो फिर जिद से क्या लाभ होगा ? विद्वान झुक कर भी संकट से मुक्ति पा जाते हैं!
इस आंदोलन से प्रतीत होता है कि भारत में वामपंथ विचार ने फिर से नया रूप ले लिया है जो किसी बड़ी समस्या से कम नहीं होगा! छात्र आंदोलन को कुचलने का प्रयास सरकार को मुसीबत में फंसाने वाला प्रतीत होता है!
वैचारिक रूप से मजबूत लोगों को लाठी गोली से भी डर नहीं लगता ऐसा इस आन्दोलन में देखने को मिला है! बच्चों के मिजाज को समझना होगा, उनकी जिद से जीत पाना कठिन होगा!
एक युवक खूब वायरल हुआ जो बोलता है खूब मारो! सरकार को चाहिए कि वह जन भावना को समय रहते समझने की कोशिश करे ! कहीं ऐसा न हो कि भारत में वामपंथ अपरोक्ष रूप से पुनः काबिज हो जाए! इसे भूलना नहीं चाहिए कि वामपंथ का जन्म दमन और अत्याचार की कोख से होता है!
वैचारिक रूप से बहुत मजबूत लोग क्रांति की धार को तेज करने लगे हैं! सारा विपक्ष एक हो गया है जो युवाओं और कॉक्रोच का समर्थन कर रहा है! कॉक्रोच जनता पार्टी के आंदोलन में वामपंथ का चश्मा प्रतीत हो रहा है!
इतिहास में भी देखा गया है कि धर्म और जाति के बंधन को वामपंथ ने तोड़ा है! कई सवाल इस समय खड़े होने लगे हैं जो सरकार को मुसीबत में ला सकते हैं! समय रहते समझना पड़ेगा और जन भावना को अंगीकार करना ही समय का मांग है! भावी भारत किन हाथों में जाएगा ये कहना कठिन होगा! भारत का भविष्य सड़कों पर है!
अपने परिवार के बच्चों से इन बच्चों की तुलना करनी होगी! क्या मिजाज है वर्तमान में युवा वर्ग का इसे बहुत गंभीरता से सोचना होगा! गरम मिजाज जब घर के अंदर पसंद नहीं बच्चों को तब बाहर किसकी मजाल है कि वह भावी भारत को दादागिरी दिखा सके!
भोजन में ही उत्तेजना और ग़ुस्सा केमिकलों ने पैदा कर दिया है जिससे भावी भारत गुस्सा जल्द होने वाला स्वभाव दिखा रहा है! कई कारण हैं इस मिजाज के पीछे जिसे नीति निर्माताओं को देर सबेर समझना पड़ेगा वरना देश में अशांति जन्म ले सकती है! (प्रधान संपादक जीवन जोशी का आंकलन)
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