

काशीपुर/उत्तराखंड:
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GBPUAT) ने पर्वतीय क्षेत्रों के लिए एक विशेष ‘सब्जी उत्पादन मार्गदर्शिका’ जारी की है।
मार्गदर्शिका में उत्तराखंड को ऊंचाई और जलवायु के आधार पर चार अलग-अलग जोन (365 मीटर से लेकर 2472 मीटर से अधिक ऊंचाई तक) में बांटा गया है। इसके तहत किसानों को उनके क्षेत्र की जलवायु के अनुसार बुवाई के सही समय, बीज, खाद और सिंचाई की सटीक जानकारी दी गई है।
पॉलीहाउस तकनीक और रोगरोधी किस्मों पर जोर
किसानों को पॉलीहाउस तकनीक अपनाने की सलाह दी गई है। इसके लिए पंत पॉलीहाउस टमाटर-1 और 2 जैसी विशेष किस्में विकसित की गई हैं, जिनसे पैदावार दोगुनी हो सकती है। इसके अलावा, पीला मोजेक रोधी भिंडी और जीवाणु झुलसा रोधी टमाटर जैसी बीमारियों से बचाने वाली किस्में तैयार की गई हैं, जिससे किसानों का दवाओं पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय बाजारों में बनेगी पहचान
विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इन 28 उन्नत किस्मों की मदद से सब्जियों के स्वाद और गुणवत्ता में भारी सुधार होगा। पहाड़ों की चेरी टमाटर, शिमला मिर्च और पहाड़ी आलू की मांग होटल, रेस्टोरेंट और ऑर्गेनिक बाजारों में ब्रांड के रूप में बढ़ेगी। जीआई टैग और ब्रांडेड पहचान मिलने से पहाड़ी सब्जियों की पहुंच स्थानीय मंडियों से निकलकर देश के बड़े राष्ट्रीय बाजारों तक होगी, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
लेटैस्ट न्यूज़ अपडेट पाने हेतु -
👉 हमारे व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़ें
👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें
👉 न्यूज अपडेट पाने के लिए 8218146590, 9758935377 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें




Subscribe to my channel
More Stories
कबड्डी के चैंपियन बने MBPG कॉलेज के धुरंधर: फाइनल में काशीपुर को 11 अंकों से चटाई धूल
काशीपुर महाराणा प्रताप चौक ROB पर यातायात ठप: दरारें और सरिया बाहर आने के बाद NHAI ने बदला पुराना ज्वाइंट
स्वास्थ्य शिविरों के चक्कर में अस्पताल में ओपीडी ठप: महिला डॉक्टर के इंतजार में घंटों बैठे रहे मरीज, बिना इलाज लौटे घर