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बिंदुखत्ता को 3470 हेक्टेयर जमीन पर राजस्व गांव बनाने के लिए निर्वनीकरण की तैयारी, लेकिन हाईकोर्ट के लिए 30 हेक्टेयर जमीन पर भी फंसा पेच!

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दूरगामी नयन डेस्क

हाईकोर्ट शिफ्टिंग का वन भूमि प्रस्ताव REC ने किया निरस्त, गैर-वन भूमि तलाशने के निर्देश; बिंदुखत्ता के राजस्व गांव की मांग पर उठे सवाल—जब 30 हेक्टेयर का विकल्प नहीं मिला, तो 3470 हेक्टेयर का रास्ता कैसे होगा आसान?

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लालकुआं/बिंदुखत्ता। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने के लिए निर्वनीकरण की प्रक्रिया को विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन उत्तराखंड हाईकोर्ट को शिफ्ट करने के लिए प्रस्तावित महज 30 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि के मामले में क्षेत्रीय सशक्त समिति (REC) के फैसले ने इस प्रक्रिया की व्यावहारिक चुनौतियों को लेकर बहस तेज कर दी है।

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REC ने हाईकोर्ट निर्माण के लिए प्रस्तावित 30 हेक्टेयर वन भूमि के इस्तेमाल से जुड़े प्रस्ताव को स्थल-विशिष्ट नहीं मानते हुए निरस्त कर दिया। समिति ने संबंधित एजेंसी और राज्य सरकार को उपयुक्त गैर-वन भूमि तलाशने के निर्देश दिए। प्रस्ताव में 123 पेड़ों की कटाई भी शामिल थी।

30 हेक्टेयर जमीन पर अड़चन, 3470 हेक्टेयर बिंदुखत्ता का क्या होगा?

वनाधिकार समिति, बिंदुखत्ता के सचिव भुवन भट्ट ने इस फैसले के संदर्भ में सवाल उठाया है कि जब हाईकोर्ट जैसी महत्वपूर्ण परियोजना के लिए 30 हेक्टेयर जमीन के मामले में वैकल्पिक भूमि तलाशने और वन संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर अड़चनें सामने आ रही हैं, तो करीब 3470 हेक्टेयर क्षेत्र वाले बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने के लिए निर्वनीकरण की प्रक्रिया कितनी आसान होगी?

समिति का कहना है कि वह निर्वनीकरण का विरोध नहीं करती, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इस प्रक्रिया को पूरा करना बेहद कठिन हो सकता है।

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FRA-2006 के तहत अधिकारों की मान्यता पर जोर

भुवन भट्ट के अनुसार, वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत पात्र वनवासियों के अधिकारों की मान्यता के लिए हर मामले में वन भूमि का अनारक्षण या निर्वनीकरण अनिवार्य नहीं है। ऐसे में बिंदुखत्ता के पात्र निवासियों के अधिकारों की मान्यता के लिए वनाधिकार कानून के तहत उपलब्ध प्रक्रिया पर गंभीरता से काम किया जाना चाहिए।

उन्होंने स्थानीय लोगों से राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर ग्रामसभा के सदस्य के रूप में वनाधिकार समिति के अभियान का समर्थन करने और एकजुट होकर सहयोग करने की अपील की।

अब सवाल यह है—जब महज 30 हेक्टेयर वन भूमि पर हाईकोर्ट शिफ्टिंग का प्रस्ताव अटक गया, तो 3470 हेक्टेयर बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की राह कितनी चुनौतीपूर्ण होगी?

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