

उत्तराखंड के जनपद नैनीताल में स्थित मिनी उत्तराखंड (बिंदुखत्ता) वर्तमान में बड़ी विडंबना झेल रहा है! वन अधिकार संगठन कहता है वनाधिकार कानून 2006 के अनुसार बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव घोषित किया जाए।
इसके लिये वह अपने दावे को एक मात्र राजस्व गांव का रास्ता बता रहा है और इसके लिये ऐतिहासिक प्रदर्शन कर जनभावना को जगजाहिर कर चुका है! एक स्वर में जनता राजस्व गांव की मांग कर रही है!
सरकार निर्वनीकरण का रास्ता खोज रही है तो इंडिया गठबंधन ने भी सरकार के सुर में सुर मिलाया है! इसके खिलाफ अब वन अधिकार संगठन ने बड़ी लड़ाई का एलान किया है तो वहीं इंडिया गठबंधन ने देहरादून कूच करने की बात कही है!
चुनाव आचार संहिता लागू होने से पूर्व राजस्व गांव घोषित होगा ये उम्मीद पूरी होते नहीं दिख रही है! सीएम पुष्कर धामी ने इसके लिये एक कमेटी बनाकर रास्ता निकालने का भरोसा दिया है!
वन अधिकार संगठन अध्यक्ष उमेश भट्ट ने कहा है बिंदुखत्ता की जनता बीस दिसंबर को कुमाऊँ के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में विशाल प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा सरकार को चाहिए कि वह जन भावना का सम्मान कर लोगों को उनका कानूनी रूप से मौलिक अधिकार प्रदान करे।
अब स्थानीय विधायक इस मुद्दे को लेकर चुनाव पूर्व क्या गुल खिलाते हैं जिससे वह अपना किया वायदा पूरा कर सकें। क्योंकि इन साढ़े चार सालों में जो धरातल पर कार्य दिखना था वह नहीं दिख सका है! सभी सड़कें ध्वस्त हो गई हैं!
पंडित नारायण दत्त तिवारी व हरीश चंद्र दुर्गापाल के कार्यकाल में बनी सड़कों का रिन्युअल तक स्थानीय विधायक डॉ मोहन बिष्ट नहीं ला सके! नदी किनारे सभी तटबंध बह गए!
लोग बोले मजबूत दीवार बनाओ तो रेत की दीवार बनाकर चैनलाइज का कार्य हुआ जिसका कहीं अता पता नहीं है! आंदोलन कर रहे लोगों को उपनाम देने से जनता में उबाल है!
जो अभी प्रकट नहीं हो रहा है समय आने पर ये उपनाम देना ज्वालामुखी का काम करेगा! स्थानीय विधायक डॉ मोहन बिष्ट चुनाव से पूर्व राजस्व गांव घोषित करवाने में विफल रहे तो उनका टिकट कटना तय सा लगता है! कद के हिसाब से देखा जाए तो डा मोहन बिष्ट ने पूर्व सीएम हरीश रावत को धूल चटाई थी!
लोगों को उम्मीद थी मोहन बिष्ट मंत्री बनेंगे और विकास की बाढ़ दुर्गापाल के समय जैसी आएगी! लेकिन मोहन बिष्ट की बदकिस्मती इसे कहें या फिर जनता की कहें! मंत्री पद रहा दूर विधायक जी एक बार सीएम पुष्कर धामी को अपने क्षेत्र में नहीं ला सके! बिंदुखत्ता के लोगों को वह सीएम पुष्कर धामी से न मिला सके!
बिंदुखत्ता के लोगों के बीच सीएम पुष्कर धामी को न लाने का कारण भी जनता आज तक न समझ सकी ? क्या कोई शिकायत का डर रहा ? या धरातल पर दिखने लायक कुछ न किया गया ? जनता आज तक अपने बीच सीएम पुष्कर धामी को न देख सकी!
कई सवाल उठने लगे हैं! दुकानों सार्वजनिक बैठ की जगहों पर आजकल राजस्व गांव घोषित करने के वायदे पर तरह तरह की चर्चा होने लगी है! ये चर्चा चुनाव तक क्या रूप लेगी ये आने वाले समय में देखने को मिलेगा।
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