
देहरादून। दरोगा भर्ती घोटाला उत्तराखंड किसी से छिपा नहीं है। सन 2015/16 में 339 दरोगा बने थे जिसमें चालीस से अधिक दरोगा रिश्वत देकर स्टार पा गए थे। यह चर्चा थी कि 15 लाख दो और दरोगा बन जाओ!
चर्चा हुई तो सितंबर 2022 में विजिलेंस ने मामला पंजीकृत कर जांच शुरू की थी। आठ साल तक मामला जांच तक सीमित रहा लेकिन जब हाकम सिंह रावत को भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया गया तो दरोगा भर्ती मामला फिर सुर्खियों में आ गया था।
इसके बाद सीएम पुष्कर धामी सरकार ने जांच तेज करने का आदेश दिया तो जांच में बीस दरोगा नप गए। इसके साथ ही कई और नाम रडार पर आ गए थे जिनकी जांच जारी है।
बताया जा रहा था कि जल्द ही और नाम सामने आएंगे लेकिन जांच ढीली पड़ने से आरोपी सभी दरोगा सामने नहीं आए हैं जिससे लोगों को आशंका हो रही है कि कुछ ही लोगों पर गाज गिरी और कई बच गए हैं।
लोग चर्चा कर रहे हैं कि कुछ लोग फिर अपने को बचाने में सफल होते दिख रहे हैं जबकि सरकार ने कहा है कि कोई भी रिश्वतखोर बचेगा नहीं।
फिलहाल जांच की धीमी गति के चलते तरह तरह की बातें लोग कर रहे हैं। लोग कहते हैं जांच में दूध का दूध पानी का पानी होना चाहिए।















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