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ब्रेकिंग न्यूज: *होली को सादगी से मनाएं हुड़दंग से रहें दूर*! पढ़ें : *होली में क्या न करें*…

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आज होली का रंग पड़ रहा है और होली प्रारंभ हो रही है होली रंगों और उल्लास का पर्व है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में यह खुशी कई बार लापरवाही और असंवेदनशील व्यवहार के कारण भय में बदल जाती है।

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रंग खेलने के नाम पर कुछ लोग सीमाएं लांघ देते हैं। खासतौर पर महिलाओं के साथ जबरन, गलत तरीके से रंग लगाना न केवल अपमानजनक है, बल्कि खतरनाक भी है।

आज बाजार में मिलने वाले कई रंग केमिकल से बने होते हैं। इनमें मौजूद हानिकारक तत्व त्वचा को जलन, एलर्जी और दाग दे सकते हैं। सबसे बड़ा खतरा आंखों और बालों को होता है।

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आंखों में रंग चला जाए तो जलन, सूजन और गंभीर स्थिति में दृष्टि को नुकसान तक हो सकता है। बालों पर इन रंगों का असर लंबे समय तक रहता है।

बालों का झड़ना, रूखापन और स्कैल्प की समस्याएं आम हैं। खतरे की गंभीरता को गाजियाबाद की मनीषा शुक्ला की घटना से समझा जा सकता है। पिछली होली पर रंग खेलते समय उन पर इस तरह रंग लगाया गया कि वह आंखों में चला गया।

इसके बाद उनकी आंखों की रोशनी चली गई। ऑपरेशन के बाद भी उनकी दृष्टि पूरी तरह लौट नहीं पाई। यह एक दर्दनाक उदाहरण है कि थोड़ी सी लापरवाही किसी की जिंदगी हमेशा के लिए बदल सकती है।

होली पर उत्साह जरूरी है, लेकिन सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी है। किसी पर जबरन रंग न लगाएं। चेहरे, खासकर आंखों के पास रंग लगाने से बचें। केमिकल वाले पक्के रंगों का उपयोग न करें,जहां संभव हो, प्राकृतिक या हर्बल रंग चुनें।

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रंग खेलने से पहले त्वचा और बालों पर तेल या मॉइस्चराइज़र लगाएं ताकि रंग का असर कम हो। आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा उपयोगी हो सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के साथ विशेष सावधानी बरतें।

होली का अर्थ शरारत नहीं, सम्मान और आनंद है। कानून और प्रशासन से भी अपेक्षा है कि वे खतरनाक रंगों की बिक्री पर सख्ती करें और जागरूकता बढ़ाएं।आइए, इस होली पर संकल्प लें कि हम सिर्फ खुशी बांटेंगे, किसी की सुरक्षा और सम्मान से खिलवाड़ नहीं करेंगे। तभी होली सचमुच रंगों का, रिश्तों का और जिम्मेदारी का पर्व बनेगी। सहयोग: विनायक फीचर्स

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