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ब्रेकिंग न्यूज:*क्या *कॉक्रोच* से हिला सिंहासन*! छात्र आंदोलन ने तोड़े सभी रिकॉर्ड! पढ़ें दिल्ली अपडेट…

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नई दिल्ली। भारत के इतिहास में पहलीबार विद्यार्थियों के आक्रोश से थमी संसद! नहीं चल पाई युवाओं के नारों की गूंज से ऐसा प्रतीत हो रहा था! जंतर मंतर से सूनी सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब जिसने हिला दिया पूरी वोव्यस्था को!

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संसद भवन के गेट बंद बंद करने पड़े और प्रधानमंत्री मोदी भारी सुरक्षा के बीच अपने आवास लौटे! यह भी नरेंद्र मोदी सरकार में पहली बार देखने को मिला!

परीक्षा में पेपर लीक मामले को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के स्थिपे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के हजारों प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को संसद की ओर मार्च के दौरान बैरिकेड को कथित तौर लांघने की कोशिश की जिसके बाद सुरक्षा बलों ने संसद मार्ग के पास लाठीचार्ज किया।

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सोमवार की सुबह 11 बजकर 25 मिनट पर प्रदर्शनकारियों ने उच्च सुरक्षा क्षेत्र में लगाए गए कई अवरोधक हटाने और उन्हें लांघने का प्रयास किया।

संसद भवन तक जाने से रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए और बल प्रयोग भी किया गया।

बिगड़ते माहौल को देखते हुए संसद भवन की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई है। संसद भवन के गेट बंद कर दिए गए हैं। किसी को भी अंदर बाहर आने-जाने की अनुमति नहीं है।

सीआईएसएफ ने परिसर को पूरी तरह से अपने घेरे में लेकर मोर्चा संभाल लिया है। मानसून सत्र के लिए संसद पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हंगामे के चलते बिन सत्र संबोधित किए ही वापस अपने आवास लौट गए।

आंदोलन के उग्र रूप के चलते झड़प जैसी स्थिति बन गई, जिसमें कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें भी आईं हैं।

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सूत्रों के मुताबिक, घटना के बाद 10 से 15 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इधर आंदोलन में गैर भाजपा दलों के कूदने से और किसानों का समर्थन मिलने से सरकार की मुसीबतें बढ़ सकती हैं!

लोग अब धर्मेंद्र प्रधान की जगह प्रधानमंत्री के खिलाफ आंदोलन को धार देने लगे हैं! दिल्ली में युवाओं के प्रदर्शन ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

सरकार को चाहिए कि वह इस आंदोलन की आत्मा को समझे और टकराव का रास्ता न अपनाकर बातचीत का रास्ता निकाले! युवाओं का आक्रोश उनकी आत्मा में लगने वाली चोट का प्रदर्शन है जिसे महसूस करना सरकार का काम है! युवा दिशा भटके कि पहले ही इसका समाधान होना चाहिए और लोकतंत्र का सम्मान जिंदा रहना चाहिए।

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