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ब्रेकिंग न्यूज: *आपदा प्रदेश बन गया उत्तराखंड! पढ़ें जल, जंगल, जमीन और उत्तराखंड की जनता…

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उत्तराखंड आपदा प्रदेश बन गया है जो चिंता का विषय है! इसके कारणों पर जाना ही होगी क्योंकि राज्य के अस्तित्व का सवाल खड़ा होने जा रहा है!

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सरकते पहाड़ और बादल फटने की घटना ने राज्य के अस्तित्व पर सोचने को विवश कर दिया है! पर्यावरण संरक्षण के लिए भूगर्भीय मामलों के एक्सपर्ट लगातार दशकों से चिंता का इजहार करते आ रहे थे कि पहाड़ की हालत चिंताजनक होती जा रही है!

लेकिन इस सामाजिक चिंता में डूबे लोगों की बात को हमेशा से दर किनार किया जाता रहा! आज पर्यावरण संरक्षण के लिए लड़ने वाले चिपको आंदोलन जैसे आंदोलन का संचालन करने वाले लोग जानते थे कि जल, जंगल और जमीन पर जनता का अधिकार छिन जाएगा तो पहाड़ पर बड़ा संकट आएगा!

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इतनी बड़ी आपदा लगातार जो आ रही है उसके पीछे के कारण पर जाना होगा! लोगों की भागीदारी जल, जंगल, जमीन में बढ़ानी होगी। उत्तराखंड में सामूहिक प्रयास किया जाना चाहिए कि किस तरह आपदा को कम किया जा सकेगा!

नदियां लगातार आबादी की तरफ तेजी से भू कटाव कर रही हैं जो आने वाले समय में बड़ी त्रासदी का संकेत है। जनता का जल, जंगल और जमीन पर अधिकार जब तक था वह जल, जंगल और जमीन की चिंता करती थी और जिन जगहों पर भूस्खलन का खतरा होता था वहां पेड़ और दीवार लगाकर उसे रोक देती थी लेकिन आज जनता को जल जंगल जमीन से दूर करना आपदा को आमंत्रण नजर आ रहा है। सरकारों को चाहिए कि वह जल जंगल जमीन पर जनता का अधिकार रखे और उसे उसके अधिकार का पालन करने दे तो आधी समस्या घर बैठे हल हो जाएगी! कैसे इस आपदा को कम किया जाए इसे लेकर एक्सपर्ट लोगों की बैठक होनी चाहिए जिसमें हिमालय के निकट बसे राज्यों को बरसात में आपदा से बचाने के लिए नए तरीके खोजने की जरूरत है।

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