Durgami Nayan

Latest Uttarakhand News in Hindi

ADVERTISEMENTS Ad

ब्रेकिंग न्यूज: *दुर्गम स्थान पर रहने के कारण पड़ा नाम दुर्गा*! पढ़ें नवरात्र पर खास प्रस्तुति…

Ad
खबर शेयर करें 👉

हमारा देश धर्म प्रधान राष्ट्र है जिसके कण-कण में देवी शक्ति का स्वरूप निहित है। नदी, पर्वत, वृक्ष, यक्ष, किन्नर, गंधर्व, स्त्री, पुरुष में देवी भावनाओं से ओत-प्रोत भारतीय जनमानस ने अपनी श्रद्धा को प्रकट किया है। मातृ देवी की आराधना का क्रम प्राचीनकाल से परम्परागत ढंग से चला आ रहा है।

ADVERTISEMENTS

काल की सीमा में बद्ध करने वाले विद्वानों ने चतुर्थ सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व से देवी की उपासना परंपरा को माना है। अर्थात देवी उपासना मानव सभ्यता के प्रारंभिक युग से ही होती चली आ रही है।

मानव की आरंभिक स्थिति व दशा वर्तमान की भांति नहीं रही है। वे जहां भी रहे जिस स्थिति में जीवन यापन करते रहे देवी शक्ति की सत्ता को अंगीकार कर अभिलक्षित इष्ट की प्राप्ति करते रहे हैं।

इसका संकेत भारतीय सभ्यता के मोहन जोदड़ो, हड़प्पा तथा अन्य स्थानों पर प्राप्त मृण्यमयी देवी प्रतिमाओं से मिलता है। भारत के साथ अन्य राष्ट्रों में भी देवी मनुष्य की अनेक व्याधियों से रक्षा करती रही है।

यह भी पढ़ें 👉  ब्रेकिंग न्यूज: *महिलाओं को कांग्रेस से जोड़ने उतरी *खष्टी बिष्ट*! पढ़ें : कहां बांटे मनोनयन पत्र...

विशेषकर मेसोपोटामिया, मिस्र एवं बेवीलोन में सिन्धु घाटी सभ्यता से प्राप्त काली और चण्डी की मूर्तियां पूर्व की अर्चन संस्कृति की स्मृति को दृढ़ करती है।

दरअसल नवरात्रि का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितना प्राचीन भारत देश। श्री पंचानन तर्क रत्न ने ऋग्वेद के एक मंत्र को प्रमाण रूप से प्रस्तुत करते हुए यह सिद्ध करने का प्रयास किया है कि वैदिक आर्य भी नवरात्र मनाते थे। हंसावती ऋचा के नाम से प्रसिद्ध इस मंत्र में महिषासुर मर्दिनी, सिंह वाहिनी दुर्गा का विशेष संबंध बताया गया है।

श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार दानवेन्द्र रावण का वध करने और सीता को उसकी कैद से मुक्त कराने के लिए भगवान राम को जगदम्बा की शरण में जाना पड़ा और उन्होंने ही ब्रह्मा की सहायता से सुप्त भगवती को जगाया, इसलिए तभी से नवरात्र मनाने का प्रचलन शुरू हुआ।

भारतीय संस्कृति में ऋतुओं के सन्धिकाल का विशिष्ट महत्व है। इसे हमारे देश के ऋषियों ने शक्ति संचय पर्व के रूप में मनाए जाने की परम्परा भी कहा है ताकि मानव अपने शरीर ऋतुओं के प्रभाव से बचाकर शक्ति आराधना में मन रमाए और प्रकृति के नियमानुसार जीवन जी कर शक्ति संचय कर सके।

स्वास्थ्य की दृष्टि से नवरात्र में व्रत करने के विधान का वैज्ञानिक आधार है। ऐसा करने से मानव शरीर व्याधियों से बचता है और विषाणु उनके शरीर पर घातक प्रभाव नहीं जमा पाते हैं क्योंकि इस शक्ति संचय पर्व में संयम में रहना ही शरीर में शक्ति का प्रस्फुटन करना है।

यह भी पढ़ें 👉  ब्रेकिंग न्यूज: *लोकसभा में उठाया भारतीय न्यायालयों में ई-फाइलिंग का मुद्दा*! पढ़ें ~ कितने मामले हुए दर्ज...

दुर्गा की उपासना नारी शक्ति की उपासना का ही एक रूप है। मां सिर्फ जननी ही नहीं रहती, वह शक्ति होती है और वह आत्मिक भी होती है। इसलिए मॉं दुर्गा को जगजननी भी कहा जाता है।

मां की उपासना में आराधना ही नहीं आनंद भी होता है इसलिए नवरात्रि में दुर्गा माता की पूजा सिर्फ विशेष उपासना पद्धति ही नहीं, उत्सव भी है, शक्ति की आराधना के बहाने समाज की मंगल कामना का विधान ही, दुर्गापूजा की लोकप्रियता का कारण रहा है। दुर्गा का अर्थ है दुर्गम स्थान में रहने वाली देवी, जिसके पास सहज ही नहीं पहुंचा जा सकता।

इस तरह दुर्गा के रूप में तीन देवियां थीं एक हिमालय शिखरों पर आसीन हेमवती पार्वती, दूसरी समुद्रवासिनी प‌द्मासना कमला और तीसरी देवी अरण्यवासिनी यानि जिन्हें विंध्यवासिनी देवी भी कहा जाता है। इस तरह संपूर्ण भारत में दुर्गा की सत्ता का प्रकाश था। सहयोग: विभूति फीचर्स

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

लेटैस्ट न्यूज़ अपडेट पाने हेतु -

👉 हमारे व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़ें

👉 फ़ेसबुक पेज लाइक/फॉलो करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

👉 न्यूज अपडेट पाने के लिए 8218146590, 9758935377 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें