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ब्रेकिंग न्यूज *शिक्षक दिवस और उसकी महत्ता! * प्रधान संपादक जीवन जोशी* की अपनी बात*…*पहले गुरु वेतन से किताब खरीदकर बांट देते थे, आज बुक सेलर से कमीशन बांध रहे हैं*! पढ़ें शिक्षक दिवस पर खास अपडेट*…

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भारतप्रधान संपादक जीवन जोशी की कलम से…

शिक्षक दिवस पर आज डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को नमन करने के साथ ही शिक्षक दिवस पर चर्चा होनी चाहिए! शिक्षक की महत्ता और शिष्य के कर्तव्य आज के दौर भी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखें इसलिए आज चिंतन किया जाना चाहिए कि एक महान विभूति ने अपना जन्म दिन एक शिक्षक को क्यों समर्पित किया होगा! सेमिनार होने चाहिए इस समाज को अनुशासन में रखने के लिए शिक्षक दिवस ज्ञान देने वाला राष्ट्रीय पर्व है।

हर विद्यालय में शिक्षक दिवस मनाया गया और विभिन्न व्याख्यान देने की परम्परा अनवरत रूप से क्रमशः रही! शिक्षक ने ही इस समाज की अनुशासन दिया है और जीने की कला दिखाई है! लेकिन आज के दौर में गुरु और शिष्य के बीच अभद्रता अश्लीलता जैसे पहलू जब पढ़ने को मिलते हैं और देखने को मिलते हैं तो गुरु और शिष्य की महत्ता पर सवालिया निशान लगते हैं!

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स्वच्छ समाज के निर्माण में गुरु का बहुत बड़ा महत्व है! अब गुरु किसे मानेंगे! गुरु का सीधा अर्थ ज्ञान देने वाला! आज समाज में गुरु और शिष्य का रिश्ता कमजोर होता जा रहा है! पहले गुरु ऐसे थे जो अपने वेतन के पैसे से गरीब बच्चों की किताब खरीदते थे! आज बुक सेलर से कमीशन बांध रहे हैं तो कितना अंतर आ गया!

आज भी कई शिक्षक गरीब लोगों के बच्चों को निःशुल्क पढ़ा रहे हैं और सरकार ने भी हर विद्यालय में एक कोटा तय किया है! गुरु अपनी गरिमा का पालन करें और शिष्य को भी गुरु का सम्मान करना होगा तब इस शिक्षक दिवस पर चार चांद लगा करेंगे! बदला कुछ नहीं सोच में आमूलचूल परिवर्तन ही चिंता को रेखांकित करता है।

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भविष्य के निर्माता गुरु का जिसने भी कहना माना वह शिष्य प्रतिभाशाली होता है क्योंकि गुरु का आशीर्वाद जिसे मिला वह कामयाब हो जाता है! जिस तरह एक चालक परिचालक को चालक बनाता है उसी तरह गुरु शिष्य को ज्ञान प्रदान करता है!

ज्ञान से ही चंद्रमा में पहुंच गया इंसान! इसलिए शिक्षक दिवस समारोह के बीत जाने के उपरांत भी समाज को शिक्षक दिवस की महत्ता को अंगीकार करना चाहिए जो जीवन के सफल होने का मूल आधार है।

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