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ब्रेकिंग न्यूज: *वक्त ने चुरा लिया सुर कोकिला आशा भोंसले को*! पढ़ें दुखद समाचार…

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नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत से एक युगांतकारी खबर सामने आई है। महान पार्श्व गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में मुंबई के ब्रेच कैंडी हॉस्पिटल में निधन हो गया है। टीवी चैनल आज तक द्वारा इस खबर की पुष्टि के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है।

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दशकों तक अपनी आवाज़ से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली आशा भोसले के जाने से भारतीय सिनेमा और संगीत की एक स्वर्णिम धरोहर का अंत हो गया है।

आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर एक प्रतिष्ठित शास्त्रीय गायक और रंगमंच कलाकार थे, जिनसे उन्हें संगीत की प्रारंभिक शिक्षा मिली। उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर पहले से ही संगीत जगत में स्थापित नाम थीं, लेकिन आशा भोसले ने अपनी अलग पहचान बनाने के लिए संघर्ष का कठिन रास्ता चुना।

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पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई और उन्होंने कम उम्र में ही फिल्मों में गाना शुरू कर दिया।

शुरुआती दौर में उन्हें छोटे बजट की फिल्मों में गाने का मौका मिला, लेकिन उनकी प्रतिभा जल्द ही बड़े संगीतकारों की नजर में आ गई। संगीतकार ओ . पी . नैयर के साथ उनकी जोड़ी ने उन्हें लोकप्रियता के शिखर तक पहुंचाया। इसके बाद R. D. Burman के साथ उनकी साझेदारी ने भारतीय फिल्म संगीत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

उनकी आवाज़ में एक अनोखी मिठास, नटखटपन और गहराई थी, जिसने हर तरह के गीतों को जीवंत बना दिया।

उन्होंने अपने करियर में हजारों गाने गाए और हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, तमिल, मलयालम और कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में भी अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा। “पिया तू अब तो आजा” Caravan, “दम मारो दम” Hare Rama Hare Krishna, “चुरा लिया है तुमने” Yaadon Ki Baaraat, “ये मेरा दिल” Don और “इन आंखों की मस्ती” Umrao Jaan जैसे गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं और उनकी अमर आवाज़ की गवाही देते हैं।

अपने लंबे और शानदार करियर के दौरान Asha Bhosle को अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया, जिनमें Padma Vibhushan और Dadasaheb Phalke Award प्रमुख हैं। उन्हें दुनिया की सबसे अधिक गीत रिकॉर्ड करने वाली गायिकाओं में भी गिना जाता है, जो अपने आप में एक अद्वितीय उपलब्धि है।

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आशा भोसले की सबसे बड़ी पहचान उनकी बहुमुखी प्रतिभा रही। उन्होंने शास्त्रीय संगीत से लेकर ग़ज़ल, पॉप, कैबरे और लोक संगीत तक हर शैली में अपनी अलग छाप छोड़ी। उनकी आवाज़ में भावनाओं की ऐसी विविधता थी कि हर गीत एक नई कहानी कहता था। यही कारण है कि वे हर पीढ़ी की पसंद बनी रहीं और उनके गीत समय के साथ और भी प्रासंगिक होते गए।

उनके निधन से संगीत जगत में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसे भर पाना संभव नहीं है। Asha Bhosle केवल एक गायिका नहीं थीं, बल्कि एक युग थीं, जिन्होंने भारतीय संगीत को नई पहचान दी। उनकी आवाज़, उनके गीत और उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेंगे और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। देशभर से कलाकार, राजनेता और प्रशंसक उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

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