Durgami Nayan

Latest Uttarakhand News in Hindi

ADVERTISEMENTS Ad

ब्रेकिंग न्यूज: *सरकारी अस्पताल से अच्छे डॉक्टर क्यों भाग रहे*! पढ़ें पंजाब से एक खास अपडेट…

Ad
खबर शेयर करें 👉
Oplus_131072

जिंदगी और मौत से जूझते मरीजों के लिए दूसरा भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर अब सरकारी अस्पतालों से किनारा करते दिख रहे हैं। डॉक्टर सरकारी नौकरी की बजाय कॉर्पोरेट और निजी अस्पतालों में काम करना ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं। पंजाब के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं, वहीं स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी भी साफ दिख रही है।
पंजाब में हर साल बड़ी संख्या में एमबीबीएस, बीडीएस, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक डॉक्टर तैयार हो रहे हैं। फिर भी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि राज्य सरकार की नीतियों की वजह से वे खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।

सिविल अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा राम भरोसे है। ड्यूटी के दौरान मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और दबाव आम बात हो गई है। सरकार ने सुरक्षा गार्ड तैनात करने की बात की थी, पर जमीन पर कुछ नहीं दिखा।

पंजाब प्रोटेक्शन फॉर मेडिकेयर पर्सन एंड मेडिकेयर इंस्टीट्यूशन बिल बने कई साल हो गए, लेकिन डॉक्टर आज भी असुरक्षित हैं। हाल में डॉक्टरों पर हमलों के कई मामले आए, पर कार्रवाई नहीं हुई।
फिरोजपुर सिविल अस्पताल में सीनियर मेडिकल अफसर का पद वर्षों से खाली है। हाल ही में पदोन्नति के बाद भी एक डॉक्टर ने पद संभालने में हिचक जताई। कारण बताया जा रहा है राजनीतिक हस्तक्षेप और यूनियनों का बढ़ता दबाव। ऐसे में कई बड़े और माहिर डॉक्टर सरकारी नौकरी छोड़कर निजी सेक्टर में चले गए हैं या अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस शुरू कर ली है।

डॉक्टरों का कहना है कि निजी अस्पतालों में वर्कलोड कम है, पैकेज बेहतर हैं और सम्मान ज्यादा है। सरकारी अस्पतालों में ओपीडी का बोझ सैकड़ों में पहुंच जाता है, जबकि निजी में मरीज सीमित रहते हैं। सरकारी नौकरी में वीआईपी ड्यूटी और बांड की बाध्यता भी डॉक्टरों को खलती है। बांड पूरा होते ही वे नौकरी छोड़ देते हैं।

नए डॉक्टरों को सरकारी अस्पतालों में सीमित सैलरी मिलती है, जबकि निजी सेक्टर में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को कई गुना वेतन आसानी से मिल जाता है। साथ ही, सरकार ने नए डॉक्टरों की पेंशन भी बंद कर दी है, जिससे सरकारी नौकरी का आकर्षण और घटा है।

पंजाब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में डिस्पेंसरी बंद कर मोहल्ला क्लीनिक खोल रही है। फिरोजपुर में चल रही आई मोबाइल टीम भी बंद हो चुकी है। केंद्र-राज्य सहयोग से बीजीआई का निर्माण तेजी से चल रहा है, पर धरातल पर डॉक्टरों की कमी अब भी बड़ी समस्या है।

न्यूरो सर्जन और प्लास्टिक सर्जन जैसे स्पेशलिस्ट सरकारी अस्पतालों में नाममात्र हैं। कई जिलों में वेंटीलेटर तो हैं, पर उन्हें चलाने के लिए तकनीकी स्टाफ और मैकेनिक के पद सृजित नहीं हैं। नतीजा ये कि मजबूरन गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है, जहाँ उनका आर्थिक शोषण होता है।

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलवीर सिंह ने कहा है कि डॉक्टरों की कमी दूर की जाएगी। डॉक्टरों की भर्ती के लिए इंटरव्यू शुरू करने की तैयारी है। आम आदमी क्लीनिकों पर अच्छे डॉक्टर तैनात किए गए हैं और युवा डॉक्टरों का सरकारी नौकरी में रुझान बढ़ रहा है।

सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा, वर्कलोड, वेतन और राजनीतिक दबाव जैसे मुद्दे हल नहीं हुए तो डॉक्टरों का पलायन जारी रहेगा। जब डॉक्टर ही असुरक्षित महसूस करेंगे, तो मरीजों को दूसरा भगवान कहाँ मिलेगा। सहयोग:विनायक फीचर्स

ADVERTISEMENTS
यह भी पढ़ें 👉  ब्रेकिंग न्यूज: *उत्तराखंड के लोकप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी पंचतत्व में विलीन*! पढ़ें दुखद समाचार...

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

लेटैस्ट न्यूज़ अपडेट पाने हेतु -

👉 हमारे व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़ें

👉 फ़ेसबुक पेज लाइक/फॉलो करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

👉 न्यूज अपडेट पाने के लिए 8218146590, 9758935377 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें