Durgami Nayan

Latest Uttarakhand News in Hindi

ADVERTISEMENTS Ad Ad

Breking news: *राष्ट्रीय विकास का भविष्य ग्रामीण समृद्धि में निहित*!पढ़ें केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह का वह भाषण जो प्रशासनिक अधिकारियों को दिया…

Ad
खबर शेयर करें 👉

मसूरी। केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसएनएए), मसूरी में 22वें मध्य-कैरियर प्रशिक्षण कार्यक्रम (एमसीटीपी) (तृतीय चरण) के समापन समारोह में मुख्य भाषण दिया।

ADVERTISEMENTS Ad

एमसीटीपी (तृतीय चरण) नौ से 14 वर्ष के सेवा अनुभव वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों के लिए एक मध्य-कैरियर प्रशिक्षण कार्यक्रम है।

इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में सेवा और विकास के संवैधानिक आदर्शों के प्रति सिविल सेवकों की प्रतिबद्धता की सराहना की।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: कैबिनेट की बैठक संपन्न,वन आरक्षी भर्ती आयु को लेकर आया बड़ा निर्णय

उन्होंने कहा कि यह सेवा ‘देश और उसके लोगों की सेवा करने के लिए आजीवन प्रतिबद्धता है। “देश के लिए और देश की जनता के लिए” के सार को उद्धृत करते हुए उन्होंने अधिकारियों से विनम्रता, अनुशासन और सहानुभूति के मूल्यों को आत्मसात करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि शासन प्रणाली सहभागी, सहानुभूतिशील हो।

साथ ही हर नागरिक तक इसकी पहुंच हो।उन्होंने महर्षि अरबिंदो के गतिशील प्रक्रिया के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए अधिकारियों को अधिकार के माध्यम से नहीं, बल्कि जागृति के माध्यम से परिवर्तन करने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने ‘अमर रहें वो मूल्य’ में निहित संवैधानिक लोकाचार पर जोर देते हुए देश की एकता और साझा जिम्मेदारी के वैश्विक दृष्टिकोण के रूप में ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के विचार की पुष्टि की।

शिवराज सिंह चौहान ने भारत की कृषि शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय विकास का भविष्य ग्रामीण समृद्धि में निहित है।

यह भी पढ़ें 👉  ब्रेकिंग न्यूज: *लोकसभा अध्यक्ष का सरोवर नगरी में जोरदार स्वागत*! पढ़ें ब्लॉक प्रमुख डॉ हरीश बिष्ट ने क्या बात रखी...

उन्होंने कहा कि “प्रयोगशाला से लेकर भूमि तक, नवाचार को हमारे किसानों के लिए वास्तविक लाभ में बदलने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि भारत के विविध कृषि-जलवायु क्षेत्र इसे फूड बास्केट के रूप में स्थापित करते हैं।

उन्होंने “लाडली लक्ष्मी” और “लाडली बहना” जैसी महत्वपूर्ण पहलों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने का जिक्र करते हुए कहा कि “महिलाओं की गरिमा, भागीदारी और सशक्तिकरण के बिना सच्चा विकास अधूरा है।

इस अवसर पर एलबीएसएनएए के निदेशक श्रीराम तरनीकांति, संयुक्त निदेशक उदित अग्रवाल, उप निदेशक (वरिष्ठ) एवं पाठ्यक्रम समन्वयक गणेश शंकर मिश्रा तथा लोक प्रशासन के प्रोफेसर डॉ. बागदी गौतम भी उपस्थित थे।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

लेटैस्ट न्यूज़ अपडेट पाने हेतु -

👉 हमारे व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़ें

👉 फ़ेसबुक पेज लाइक/फॉलो करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

👉 न्यूज अपडेट पाने के लिए 8218146590, 9758935377 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें