

सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में देशभर के नगर निकायों को आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल के मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने कहा कि जहां नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां संबंधित संपत्ति को सील किया जाए। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि जिन इलाकों में यह स्पष्ट रूप से तय नहीं है कि उनका इस्तेमाल आवासीय या व्यावसायिक किस उद्देश्य के लिए किया जाना है, उनकी भी जांच की जाए।
कोर्ट ने कहा है आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि नहीं होनी चाहिए! तो क्या अब आबादी के बीच खनन का कारोबार करने वाले स्टोन क्रशर पर भी सुप्रीम कोर्ट के नियम लागू होंगे ? नियम तो व्यवसायिक कार्य को लेकर है तो इस आदेश के चलते आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक कार्य को लगे सभी स्टोन क्रशर और कार्यों पर प्रतिबंध लगेगा ?
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार तो आबादी के बीच व्यवसायिक कार्य पर नई गाइड लाइन आने से क्या उस जनता को न्याय मिल सकेगा जो हर रोज भोजन के साथ धूल, रेता, बजरी कंकड़ खाने को मजबूर है जिससे टीबी, कैंसर , स्वास की बीमारी का ग्रास बनती जा रही है।
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