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Breeking news: *मिट्टू की फुर्तीली पूँछ एकदम स्थिर हो गई*! पढ़ें: *बाल कलाकार क्यों डरे परीक्षा से*…

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तीन अच्छे दोस्त थे। नीलू खरगोश, मिट्टू गिलहरी और चिंटू बंदर। तीनों एक ही कक्षा में पढ़ते और पूरे दिन खूब मस्ती करते।

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एक सुबह, उनकी शिक्षिका मिस पेंगुइन ने कक्षा में बताया, “प्यारे बच्चो, अगले सप्ताह वार्षिक परीक्षा होगी!”

यह सुनते ही पूरी कक्षा में चुप्पी छा गई। नीलू को लगा उसके कान ठंडे पड़ गए हैं। मिट्टू की फुर्तीली पूँछ एकदम स्थिर हो गई। चिंटू, जो हमेशा उछलता कूदता रहता, वह अपनी सीट पर शांत बैठा रहा।

स्कूल से घर लौटते हुए तीनों के कदम भारी थे। नीलू ने कहा, “मुझे लगता है कि मैं परीक्षा में सब कुछ भूल जाऊँगी। परीक्षा होती ही डरावनी है!”मिट्टू ने अपनी पूँछ को सहलाते हुए कहा ।

रास्ते में उनका सामना बुद्धिमान उल्लू दादा जी से हुआ, जो एक पुराने ओक के पेड़ पर बैठे कोई किताब पढ़ रहे थे।

उन्होंने अपने चश्मे को नीचे सरकाया और तीनों उदास चेहरों को देखकर पूछा, “अरे-अरे, आज मेरे बच्चे उदास क्यों? नीलू ने सिसकते हुए परीक्षा से डर की सारी बात कह सुनाई।

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उल्लू दादाजी मुस्कुराते हुए बोले “परीक्षा से डर?” उन्होंने आश्चर्य से कहा, “बच्चों, परीक्षा तो एक रोमांचक सफर है, एक ऐसा खेल जहाँ तुम अपनी सीखी हुई चीजों को इकट्ठा करते हो और एक खजाने की तरह सजा कर कापी में लिखते हो।”तीनों की आँखें चौड़ी हो गईं। “सफर? खेल?”

“हाँ! सुनो, मैं तुम्हें एक राज़ की बात बताता हूँ।” उल्लू दादाजी ने अपने पंख फैलाए।

“तैयारी का रहस्य यह है कि इसे दैनिक मज़ेदार अभ्यास में बदल दो। रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ो, जैसे तितली फूलों का रस चुनती है।

जो पढ़ो, उसे दोहराते रहो, यह मन का जादू है जो यादों को पक्का कर देता है। और याद रखो, अच्छी नींद और पौष्टिक भोजन तुम्हारे दिमाग के लिए ईंधन हैं, इनके बिना कोई भी यात्री आगे नहीं बढ़ सकता।”

उन्होंने कहा, “कल से शाम को मेरे पास आना। हम सब मिलकर परीक्षा के इस खेल की तैयारी करेंगे।”

अगले दिन से एक नया नियम बन गया। हर शाम, पेड़ के नीचे, उल्लू दादाजी तीनों को मजेदार कहानियों के माध्यम से पढ़ाने लगे। तीनों ने सीखा कि गणित के सवाल पहेलियों की तरह होते हैं, जिन्हें सुलझाने में मज़ा आता है।

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विज्ञान के नियम प्रकृति के खेल हैं। कविताएँ और कहानियाँ तो दोस्तों की तरह होती हैं जो हमेशा मजे में याद रहती हैं।

धीरे-धीरे, डर की जगह उत्सुकता ने ले ली। पढ़ाई बोझ नहीं रही, बल्कि एक नई खोज बन गई।

परीक्षा का दिन आया। सुबह-सुबह तीनों दोस्त तैयार हुए। नीलू ने एक गहरी साँस ली, मिट्टू ने अपनी पूँछ हिलाई, और चिंटू ने मुस्कुराते हुए कहा, “चलो, अपना सीखा हुआ खजाना दिखाने का समय आ गया है।”

कक्षा में जब प्रश्न-पत्र मिला, तो उन्होंने पाया कि ये वही प्रश्न हैं जो उन्होंने इतने मजेदार तरीके से सीखे थे। कलम चलने लगी, और डर कहीं पीछे छूट गया।

परिणाम के दिन, जब मिस पेंगुइन ने नाम पुकारे, तीनों के चेहरे खिले हुए थे। सबने अच्छे अंक पाए। पर असली जीत यह थी कि उन्होंने परीक्षा के डर को हमेशा के लिए हरा दिया था। सहयोग: विभूति फीचर्स

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