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ब्रेकिंग न्यूज:(एन0डी0पी0एस0) एक्ट, मोटर वाहन अधिनियम, मानव तस्करी, पॉक्सो एक्ट,विषय पर विधिक साक्षरता व जगरूकता शिविर! पढ़ें जनपद नैनीताल अपडेट…

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नैनीताल/भीमताल। जनपद के सुदूरवर्ती श्रेत्र श्री डूंगर सिह बिष्ट आगर राजकीय इंटर कॉलेज टांडी पोखराड एन0डी0पी0एस0एक्ट, मोटर वाहन अधिनियम, मानव तस्करी, पॉक्सो एक्ट,विषय पर विधिक साक्षरता व जगरूकता शिविर का आयोजन ।

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उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के दिशा निर्देशानुसार एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल / जिला न्यायाधीश प्रशांत जोशी के निर्देशन में सिविल जज (सी०डि०) / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल श्रीमती पारुल थपलियाल के द्वारा नैनीताल जनपद के दुरस्थ श्रेत्र श्री डूंगर सिह बिष्ट आगर राजकीय इंटर कॉलेज टांडी पोखराड में विधिक साक्षरता व जगरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

शिविर मे प्रधानाचार्य द्वारा पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया, जिसके पश्चयत सिविल जज (सी०डि०) / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल श्रीमती पारुल थपलियाल के द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के क्रियाकलाप के बारे मे विस्तार पूर्ण जानकारी दी शिविर मे छात्रा छात्राओ को एन डी पी एस एक्ट के बारे बताते हुए कहा की उत्तराखंड में नशीले पदार्थों और साइकोट्रोपिक पदार्थों (मनोविकार नाशक) से संबंधित सबसे कठोर कानून है।

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इस एक्ट का उद्देश्य मादक औषधियों, मनोरोगी पदार्थों के व्यापार, खेती, उत्पादन, निर्माण, खरीद, बिक्री, परिवहन और उपयोग को नियंत्रित करना है यह दो तरह के पदार्थ है इसमें नारकोटिक्स (जैसे चरस, गांजा, अफीम, हेरोइन, कोकेन) और साइकोट्रोपिक (केमिकल आधारित पदार्थ, जैसे एलएसडी, एमडीएमए, अल्प्राजोलम) शामिल हैं।

इस एक्ट में सजा के प्रावधान अलग अलग है सजा मादक पदार्थ की मात्रा के आधार पर तय होती है छोटी मात्रा इसमें 1 वर्ष तक की कैद या 10,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

मध्यम मात्रा इसमें 10 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।व्यावसायिक मात्रा इसमें 10 से 20 साल तक का सश्रम कारावास और 1 से 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

शिविर मे पोस्को एक्ट के बारे मे बताते हुए कहा 18 वर्ष से कम आयु का हर व्यक्ति इस कानून के तहत ‘बच्चा’ माना जाता है।बच्चे के मामले में सहमति का कोई अर्थ नहीं होता, 18 वर्ष से कम उम्र के साथ यौन कृत्य अपराध ही है।

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बच्चों को प्रताड़ना से बचाने के लिए मामलों की सुनवाई इन-कैमरा (बंद कमरे में) विशेष अदालतों में होती है।यौन हमले की गंभीरता के आधार पर सजा 3 साल से लेकर उम्रकैद तक हो सकती है, जिसमें जुर्माना भी शामिल है।

यह कानून लड़के और लड़कियां दोनों को समान सुरक्षा प्रदान करता है पॉक्सो के तहत दर्ज मामलों में पुलिस को त्वरित और संवेदनशील जांच करने के निर्देश होते हैं।

यह कानून बच्चों की गोपनीयता की रक्षा करता है और पीड़ित को तत्काल सहायता और पुनर्वास सुनिश्चित करता है।

साथ ही छात्र छात्राओं को मोटर वाहन अधिनियम, मानव तस्करी के बारे मे भी विस्तार से जानकारी दी गई।शिविर मे प्रधानाचार्य एस के दीक्षित ,पी0एल0वी0भवान पूरी, व यशवंत कुमार मौजूद रहे.

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