Durgami Nayan

Latest Uttarakhand News in Hindi

ADVERTISEMENTS Ad

ब्रेकिंग न्यूज: *अपने पुत्र शनि के घर आते हैं सूर्य देव*! मकर संक्रांति पर्व पर खास अपडेट…

Ad
खबर शेयर करें 👉
Oplus_131072

जब सूर्य भगवान दक्षिणायन से उत्तरायण में आते हैं , यानी धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते है तो वह दिन मकर संक्रांति कहलाता है।

ADVERTISEMENTS

जिस प्रकार हमारी बारह घंटे की रात और बारह घंटे का दिन होता है ,उसी प्रकार देवताओं की छह महीने की रात्रि और छह महीने का दिन मिलाकर एक दिन होता है ।

छह महीने की रात्रि में सूर्य दक्षिणायन यानी धनु राशि में रहते हैं और जब देवताओं का दिन होता है तो सूर्य उत्तरायण यानि मकर राशि में आ जाते है। इस दिवस को मकर सक्रांति कहा जाता है । यह दिन सूर्य देवता की पूजा के रूप में मनाया जाता है।


जैन धर्म की मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के पुत्र चक्रवर्ती भरत महाराज ने सूर्य के अंदर स्थित जैन मंदिर के दर्शन अपने महल से किए थे।

इसीलिए इसे जैन धर्म में भी यह पर्व मनाया जाता है लेकिन जैन धर्म में मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा नहीं है,क्योंकि इससे हिंसा होने का डर रहता है, और पतंग उड़ाने की प्रवृत्ति को पतंग काटने के कारण हिंसात्मक प्रवृत्ति माना गया है।


भारतीय पुराणों के अनुसार मकर सक्रांति के दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर एक महीने के लिए जाते हैं क्योंकि मकर राशि का स्वामी शनि है। हालांकि ज्योतिष दृष्टि से सूर्य और शनि में तालमेल नहीं होता लेकिन मकर राशि मे प्रवेश के कारण सूर्य खुद अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। इसलिए इस महीने को पिता और पुत्र के संबंधों को निकटता के रूप में भी देखा जाता है।

यह भी पढ़ें 👉  ब्रेकिंग न्यूज: *उत्तराखंड सरकार ने जारी कर दी विधायक निधि*! पढ़ें : किस मद में होनी है खर्च...


सूर्य के मकर राशि में आने के प्रभाव से दिन बड़े और रात्रि छोटी होने लगती है l प्राणियों में आत्मा की शुद्धि और संकल्प शक्ति बढ़ती है। ज्ञानतंत्र विकसित होते हैं ।

किसान अपनी फसल काटते हैं और मकर सक्रांति एक चेतना के रूप में परिलक्षित होती है।मौसम में परिवर्तन हो जाता है । इस दिन सूर्य देव की उपासना विशेष रूप से की जाती है।

हरिद्वार,काशी,प्रयागराज,गंगासागर आदि सभी तीर्थों पर श्रद्धालु स्नान दान आदि करके पुण्य कमाते हैं l पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन संक्रांति ने राक्षस किंकरासुर का वध किया था,इसलिए भी मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है।


महाभारत की कथा के अनुसार भीष्म पितामह को अपनी इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। उन्होंने देह त्याग के लिए मकर सक्रांति के दिन को ही चुना था। ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन देह त्याग से मोक्ष प्राप्ति होती है l

मकर सक्रांति के दिन ही ऐसा माना जाता है कि गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर बंगाल की खाड़ी के सागर में जा मिली थी। यहां पर राजा सगर के साठ हजार पुत्रों की राख का तर्पण किया गया था ।

बंगाल में इस स्थान को गंगासागर कहते हैं । जहां पर आज भी मकर सक्रांति के दिन बहुत बड़ा मेला लगता है। यहां मकर संक्रांति पर लाखों श्रद्धालु डुबकी लगाते हैं l
मकर संक्रांति के दिन को अंधकार के नाशक और प्रकाश के आगमन के दिवस के रूप में भी देखा जाता है l इस दिन पुण्य , दान ,धार्मिक अनुष्ठानों का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है।

यह भी पढ़ें 👉  ब्रेकिंग न्यूज: *अवैध वसूली में लिप्त पुलिस का सिपाही गिरफ्तार*! पढ़ें कितने रुपये सहित दबोचा...

गुड़ , चावल, तिल ,खिचड़ी का दान विशेष रूप से किया जाता है। मकर संक्रांति का त्यौहार पूरे देश में मनाया जाता है । इस दिन लोग खूब पतंग उड़ाते हैं पूरा आसमान पतंगों से ढक जाता है । पूरे दिन वो काटा वो काटा की आवाज सुनाई देती रहती हैं ।


अलग अलग राज्य में अलग अलग नाम से इसको लोग जानते हैं । उत्तर प्रदेश और पश्चिम बिहार में इसे खिचड़ी का पर्व कहते हैं। तमिलनाडु में इसे पोंगल के नाम से जाना जाता है। बुंदेलखंड (मध्यप्रदेश) में मकर सक्रांति को सकरात नाम से जानते हैं। पंजाब में लोहड़ी के नाम से मनाया जाता है ।

कश्मीर में शिशिर संक्रांत नाम से जाना जाता है । नेपाल में संक्रांति कहते है। थाइलैंड में इसे सोंगकर्ण नाम से मनाते हैं। श्रीलंका में उलावर नाम से लोग जानते हैं।


इस प्रकार हम देखते हैं कि मकर संक्रांति का पर्व देश ही नहीं विदेशों में भी बड़ी धूमधाम से अलग अलग नामों से मनाया जाता है । श्रद्धालु इस दिन दान दक्षिणा देकर पुण्य कमाते हैं,नदियों में स्नान करते हैं ।

मकर संक्रांति हमारे हिन्दुत्व , सनातन धर्म ,ध्यान ,अध्यात्म का वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक पर्व है । सहयोग: विनायक फीचर्स

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

लेटैस्ट न्यूज़ अपडेट पाने हेतु -

👉 हमारे व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़ें

👉 फ़ेसबुक पेज लाइक/फॉलो करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

👉 न्यूज अपडेट पाने के लिए 8218146590, 9758935377 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें