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ब्रेकिंग न्यूज: *उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस* सरकार और जनता की जिम्मेदारी पर *प्रधान संपादक जीवन जोशी* की दूरगामी समीक्षा*! *पढ़ें कैसे बदलेगा उत्तराखंड*…

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देहरादून/नैनीताल। प्रधान संपादक *जीवन जोशी” की अपनी बात…

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस सुनकर और सुनने में आनंदित कर देने वाला शब्द है! पच्चीस साल का युवा उत्तराखंड अपना सिल्वर जुबली कार्यक्रम आयोजित कर रहा है जिसमें युवा मुख्यमंत्री पुष्कर धामी सरकार है जिससे राज्य के युवा आश लगा कर बैठे हैं! राज्य भी युवा और सीएम भी युवा!

राज्य के भूमिहीन, किसान, नौजवान, मेहनतकश जनता को उम्मीद है कि सिल्वर जुबली कार्यक्रम में सीएम पुष्कर धामी सरकार उत्तराखंड आंदोलन के पीछे की सोच को जिंदा रखते हुए शहीदों के सपने साकार करने की दिशा में आगे तेजी से बढ़ेगी। सर्वांगीण विकास की सोच को धरातल पर उतार कर लाना ही सफलता का महामंत्र है!

राज्य स्थापना दिवस पर कार्यक्रम कम चिंतन अधिक की थीम पर चलकर हम बेहतर कल का निर्माण कर सकते हैं क्योंकि युवा उत्तराखंड को युवा मुख्यमंत्री मिला है जिसे युवाओं के लिए काम करना है! सामंजस्य स्थापित कर आदर्श राज्य की स्थापना इस प्रदेश की सियासत और जनता को करनी होगी!

जब खुद से बदलाव शुरू होगा तो वह बदलाव गांव के अंतिम छोर तक पहुंच जाएगा जिससे जनता और सरकार के बीच की दूरी दूर होगी और रोजगार के नए आयाम स्थापित किए जा सकेंगे!

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राज्य स्थापना दिवस पर राज्य के उद्योगों में पूर्व सरकार में घोषित 70% आरक्षण को कड़ाई के साथ लागू करने से कुछ और बेरोजगारों को रोजगार दिया जा सकता है!

सर्वे करवा ली जाए किस उद्योग में राज्य के कितने प्रतिशत कर्मचारी हैं सब सामने आ जाएगा! उद्योगों की जिम्मेदारी भी बसासत के समय तय थी कि वह स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देंगे लेकिन व्यवहार में ठीक उल्टा चल रहा है!

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस पर संकल्प लेकर आगे बढ़े और जनता की भावना को ध्यान में रखकर सरकार काम करे और पलायन की स्थिति में जो परिवार हैं उनके लिए कोई अतिरिक्त सहायता का फार्मूला निकले तो परिस्थितियां अनुकूल होती चली जाएंगी!

पहाड़ की खेती को बचाना है और इंसानों को जंगली जानवरों से बचा कर रखने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी सरकार पर आ गई है! पहाड़ में वन्य जीव और मानव के बीच संघर्ष बढ़ गया है!

अधिकारी कर्मचारी जनता के कोप भाजन का शिकार होते हैं जबकि अधिकारी नियम/ कानून के आगे नतमस्तक होने के कारण जनता का दुर्व्यवहार सहते हैं! सरकार को पच्चीस साल बाद कुछ नया करना चाहिए!

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उन परिवारों की मदद करने के लिए कोई प्रावधान करना ही होगा जो विपरीत परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं! उद्योग जगत से यह उम्मीद की जा सकती है कि वह इन सभी लोगों को सोशल फंड से सहयोग करे!

कई संस्थाएं हैं यहां लेकिन इस दिशा में किसी ने कभी पहल नहीं की! उत्तराखंड में हर परिवार से एक सदस्य को जिस दिन रोजगार देने में सरकार सफल हो गई उस दिन से पलायन रुकने लगेगा।

उत्तराखंड सरकार को इस बार स्थापना दिवस पर कुछ हटकर निर्णय लेने होंगे जो आने वाले समय में नजीर बनेंगे! अब सरकार पच्चीस साल के उत्तराखंड को क्या संदेश देती है और क्या कुछ नया पैगाम नौ नंबर को देने जा रही है यह उसके और सीएम पुष्कर धामी के विवेक पर निर्भर करता है।

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