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ब्रेकिंग न्यूज: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा चुनाव करवाओ किसने रोका! पढ़ें आगे क्या कहा त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर…

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नैनीतालचुनाव करवाओ कोई दिक्कत नहीं नियम कानून का संज्ञान बाद में भी लिया जा सकता है! शिकायत पर दो जगह मतदाता होने वालों को बाद में अदालत का सामना करना पड़ सकता है यह आज हाईकोर्ट ने इशारा कर दिया है!

उत्तराखंड में पंचायत चुनावों को लेकर एक बार फिर हाईकोर्ट के आदेश ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है! राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटिशन) को खारिज करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने अपने 11 जुलाई के आदेश को बरकरार रखा है।

अदालत ने साफ कर दिया है कि पंचायत चुनाव केवल उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम के मुताबिक ही कराए जाएं।

बताते चलें क्या है पूरा मामला…
11 जुलाई को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था कि किसी भी व्यक्ति का नाम दो जगह मतलब शहरी (नगर निकाय) और ग्रामीण (पंचायत) दोनों मतदाता सूचियों में नहीं होना चाहिए।

कोर्ट ने ऐसे दोहरे मतदाताओं के नामांकन को अमान्य ठहराया था। इसके खिलाफ राज्य निर्वाचन आयोग ने रिव्यू पिटिशन दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने अब खारिज कर दिया है।

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आयोग को नहीं मिली अब भी राहत …
राज्य निर्वाचन आयोग की दलील थी कि मतदाता सूची में नाम होने का फैसला चुनाव आयोग के क्षेत्राधिकार में आता है, और यह पंचायतीराज अधिनियम के प्रावधानों के साथ संविधान के अनुच्छेद 243K के तहत सुरक्षित है। लेकिन कोर्ट ने दो टूक कहा कि दोहरी मतदाता सूची का मामला चुनावी नैतिकता और पारदर्शिता से जुड़ा है और यह कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं हो सकता।

चुनाव पर नहीं लगाई थी पहले भी रोक ...
हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि वह पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर रोक नहीं लगा रहा है। चुनाव तय समय पर करवाए जा सकते हैं लेकिन किसी को आपत्ति है, तो वह चुनाव संपन्न होने के बाद इलेक्शन पिटिशन के रूप में अपनी शिकायत दाखिल कर सकता है। अदालत के दरवाजे खुले रहेंगे।

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इस मामले में असर और प्रतिक्रिया …
इस फैसले से राज्य में पंचायत चुनावों को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई है! कई लोग जीतकर भी घर बैठ सकते हैं!

कई उम्मीदवारों के नामांकन इस आधार पर भी रद्द हो सकते हैं कि उनके नाम नगर निकाय और पंचायत दोनों जगह के मतदाता सूची में शामिल हैं।

अब उसकी हो रही है चर्चा जिसने दो जगह का लाभ देखा…

इधर अदालत के रुख के बाद राजनीतिक हलकों में इस आदेश की व्यापक चर्चा होने लगी है और तरह तरह की चर्चा होने लगी है! विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां हाल दावेदारों ने दोनों जगह नामांकन दाखिल किए हैं। कुल मिलाकर ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ लोगों के अरमानों पर पानी फिरने वाला है तो कुछ लोगों को न्याय मिलने जा रहा है।

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