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ब्रेकिंग न्यूज: दो किलो चरस लेकर भाग रहा युवक गिरफ्तार! पढ़ें बदियाकोट अपडेट! पढ़ें क्या है तस्करी का राज…

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बागेश्वर। सीएम पुष्कर धामी सरकार के कड़े निर्देश के क्रम में जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चन्द्रशेखर घोड़के के नेतृत्व में चल रहे अवैध नशे के विरुद्ध अभियान के तहत बागेश्वर पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है।

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बीती शाम एसओजी और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने एक युवक को दो किलो छह ग्राम अवैध चरस के साथ गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।

जानकारी मिली है कि एसओजी प्रभारी निरीक्षक सलाउद्दीन खान और कोतवाल अनिल उपाध्याय के साथ में पुलिस टीम बागेश्वर–कपकोट मार्ग में पंद्रहपाली तिराहे पर चेकिंग कर रही थी।

तभी एक मोटरसाइकिल संख्या यूके 08R–7019 पर सवार युवक को पुलिस ने रोकने का इशारा किया तभी वह भागने की कोशिश करने लगा कि पुलिस ने काफी घेराबंदी कर आरोपी को दबोच ही लिया।

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पूछताछ में आरोपी की पहचान प्रदीप कुमार पुत्र स्व. दुर्गा राम, निवासी बदियाकोट, थाना कपकोट के रूप में हुई। तलाशी के दौरान उसके पास से दो किलो छह ग्राम चरस बरामद हुई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग आठ लाख रुपये से ज्यादा बताई जा रही है।

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है और न्यायालय में पेश किया गया।

एसपी चन्द्रशेखर घोड़के ने मामले का खुलासा करते हुए कहा कि जनपद में मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए पुलिस लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। उन्होंने एसओजी और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम की सराहना करते हुए ₹2000 का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की।

बताते चलें कुछ सूत्र बताते हैं जिनका नाम उजागर किया नहीं जा सकता! चरस तस्कर मोबाइल टॉवर के कर्मचारियों से तक सटीक ब्यौहार कर नायाब तरीके से काम कर रहे हैं जिससे फोन नेटवर्क भी कहीं न कहीं ये बाधित करवाने में सफल होते प्रतीत हो रहे हैं ।

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सीमांत जिले गांवों में नेटवर्क से ही नशे पर निगरानी रखी जाती है ऐसे में नेटवर्क अचानक उड़ने के कारणों पर जाने से कई रहस्य सामने आएंगे!

सूत्र बताते हैं कि मुखबिरी न हो पाए इसके लिए मोबाइल टावरों को ये बाधित करवा देते हैं ये बहुत बड़ा गुप्त राज है इसके लिए टावरों को भी निगरानी में रखे जाने की आवश्यकता महसूस होती है!

पुलिस की इस धर पकड़ से नशे के सौदागरों में हड़कंप तो है लेकिन नायाब तरीके पुलिसिंग को भी घुमा सकते हैं इसलिए हर मोबाइल टॉवर पर सरकारी तंत्र की निगरानी होना आवश्यक जान पड़ता है।

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