Durgami Nayan

Latest Uttarakhand News in Hindi

ADVERTISEMENTS Ad

Ground Report : उत्तराखंड के इन 28 गांवों में हिंदू कैसे बन गए अल्पसंख्यक? इस नियम में ढील उड़ा रही नींद…

Ad
खबर शेयर करें 👉

खबर शेयर करें 👉उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर बाहरी लोगों की घुसपैठ और इससे पैदा

ADVERTISEMENTS

उत्तराखंड के 28 गांवों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं.
बाहरी राज्यों से आए लोग परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करवा रहे हैं.
मूल निवास प्रमाण पत्र के लचीले प्रावधानों से डेमोग्राफी बदल रही है.

उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर बाहरी लोगों की घुसपैठ और इससे पैदा हो रहे डेमोग्राफिक चेंज को लेकर चिंता गहराती जा रही है. जानकार इसके लिए मूल निवास प्रमाण पत्र के लचीले प्रावधानों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. इधर बीजेपी का भी मानना है कि अब इसकी समीक्षा जरूरी हो गई है. ये ग्राउंड रिपोर्ट पछुवादून का सहसपुर क्षेत्र से है. उत्तराखंड गठन के बाद सहसपुर के 28 गांवों में हिंदू समुदाय अल्पसंख्यक होता चला गया. बाहरी राज्यों से आए लोग परिवार रजिस्टर में अपना नाम दर्ज करवा रहे हैं. फिर उन्हें हर प्रमाण पत्र आसानी से सुलभ हो जा रहा है.जानकारों का मानना है कि इसका एक बड़ा कारण मूल निवास की कोई स्पष्ट कट ऑफ डेट का तय न होना है. वर्तमान प्रावधान के अनुसार, जो कोई भी उत्तराखंड में पिछले 15 सालों से रह रहा है और उसके पास अचल संपत्ति है, उसे मूल निवासी माना जा सकता है. कई लोग मानते हैं कि राज्य की पहचान और डेमोग्राफी को सुरक्षित रखने के लिए कट ऑफ डेट 1950 या राज्य गठन के समय तय की गई 1985 होनी चाहिए.राज्य गठन के समय मूल निवास के लिए 1985 की तारीख तय की गई थी, लेकिन बाद में आई सरकारों ने इस नियम में ढील दी और अब सिर्फ 15 साल की स्थायी निवास अवधि को ही आधार बना लिया गया. बीजेपी विधायक विनोद चमोली का भी कहना है कि अब समय आ गया है कि इस नीति की समीक्षा की जाए

ADVERTISEMENTS
यह भी पढ़ें 👉  ब्रेकिंग न्यूज: *भवाली में गिरी कार पांच की मौत*! सीएम पुष्कर धामी ने जताया दुःख! पढ़ें जनपद नैनीताल अपडेट...
Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

लेटैस्ट न्यूज़ अपडेट पाने हेतु -

👉 हमारे व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़ें

👉 फ़ेसबुक पेज लाइक/फॉलो करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

👉 न्यूज अपडेट पाने के लिए 8218146590, 9758935377 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें