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ब्रेकिंग न्यूज: भोजन माताओं ने तहसीलदार के माध्यम से सीएम को भेजा ज्ञापन! पढ़ें क्या रखी मांग…

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लालकुआं। देशव्यापी आह्वान पर आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल का उत्तराखंड में भी व्यापक समर्थन देखने को मिला है। भोजन माताओं ने भी हड़ताल कर समर्थन कर हड़ताल में भाग लिया।

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इस हड़ताल में मिड-डे-मील योजना से जुड़ी भोजन माताएँ, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता सहित विभिन्न विभागों के अस्थायी, मानदेय व संविदा कर्मचारियों ने भाग लिया।भोजनमाताओं का कहना है कि वे वर्षों से अत्यंत कम मानदेय में कार्य कर रही हैं।

स्कूल खुलने से लेकर बंद होने तक का समस्त कार्य, गैस-चूल्हा न होने पर लकड़ी पर खाना बनाना, बर्तन धोना, साफ-सफाई, बच्चों की देखरेख जैसे अतिरिक्त कार्य उनसे कराए जाते हैं, फिर भी न तो उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा दिया गया है और न ही सम्मानजनक वेतन।

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इसके साथ ही अनेक विद्यालयों में महिला कर्मचारियों के साथ उत्पीड़न व अभद्र व्यवहार की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

समय पर मानदेय का भुगतान न होना, सामाजिक सुरक्षा (ईपीएफ, पेंशन, बीमा) का अभाव तथा कार्यस्थल पर असुरक्षा ने भोजन माताओं को आंदोलन के लिए विवश कर दिया है। हड़ताल के साथ सरकार से यह प्रमुख मांगें की गईं—

1-घोषित मानदेय को तत्काल लागू किया जाए।

2-भोजन माताओं को नियमित/स्थायी कर्मचारी, चतुर्थ कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।

3-महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न पर सख्त कार्रवाई होसामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिया जाए।

4-अतिरिक्त कार्य लेना तत्काल बंद किया जाए।

5-न्यूनतम वेतन लागू करो।

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6-अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा बनाए गए खाने पर रोक लगाओ।

7-स्कूलों को धुंए से मुक्त करो।

8-बच्चे कम होने या स्कूल विलयीकरण कि स्थती में भोजनमाताओं को विद्यालय से निकलना बंद करो।

9-निकाली गयी भोजनमाताओं कि पुनः कार्य पर रखा जाए।

हड़ताल में शामिल संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक व उग्र किया जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।यह संघर्ष सम्मान, अधिकार और न्याय के लिए है।

इस हड़ताल के तहत भोजन माताओं ने तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमन्त्री को ज्ञापन भेजा ।

कार्यक्रम में चंपा हेमा पुष्पा हेमा, कमला रेखा काजल सरस्वती गंगा गीता कश्यप बसंती सरोज मीणा सुमन राधा हंसी दीपा दीपा धर्म नदी आदि लोगों ने भागीदारी की।

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