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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव: अंतिम चरण का मतदान 28 जुलाई को होगा! चुनाव आयोग ने पूरी की तैयारी! आज है चुनावी कहावत *कत्ल की रात*! अन्दर पढ़ें प्रधान संपादक की अपनी बात…काश सब निर्विरोध ही जीत जाते…

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नैनीताल। उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का कल दूसरा अंतिम चरण मतदान सम्पन्न होने जा रहा है और राज्य निर्वाचन आयोग ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है!आज कर्मचारी और अधिकारी को हर बूथ स्थल तक तैनात होने के निर्देश जारी होते ही सभी चुनाव ड्यूटी में लगे लोग तामझाम के साथ अपने अपने गंतव्य को रवाना हो गए हैं!

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नैनीताल जनपद में जिला निर्वाचन अधिकारी वंदना ने कहा है शांतिपूर्वक मतदान संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक कार्य पूरे हो गए हैं और कर्मचारी और अधिकारी अपने अपने मतदान स्थल को रवाना कर दिए गए हैं!

इधर चुनाव के लिए मैदान में भाग्य आजमा रहे प्रत्याशियों के साथ *आज की रात….वोटों के कत्ल की रात…* वाली कहावत चरितार्थ होती हुई दिखाई देती है! सभी दावेदार जीतने के लिए अपने मतदाताओं को रिझा रहे हैं, अब कहावत वाली बात यहां चरितार्थ भी हो रही है ! भाजपा और कांग्रेस समर्थक प्रत्याशियों को विजई बनाने के लिए दोनों ही दलों के प्रतिनिधि जुटे हैं!

भाजपा के जिस प्रत्याशी के साथ संगठन ईमानदारी से लगा है वह सीट टक्कर दे रही है सबको लेकिन जहां संगठन और सत्ता में दूरी है वहां सीट खतरे में दिख रही है! कांग्रेस नेता इस त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव का रिहर्षल मानकर चल रहे हैं! लेकिन उत्तराखंड में धामी सरकार की धमक का असर देखने को मिल रहा है और कई सीटों पर लोग निर्विरोध चुनकर आए हैं जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत कहा जा सकता है!

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यह भी पढ़ें@ प्रधान संपादक जीवन जोशी की अपनी बात…

काश इस देश के लोग इतने समझदार होते कि हर पांच साल में एक जनप्रतिनिधि को निर्विरोध चुनकर भेजते और चुनाव के लिए होने वाले खर्च से इस देश के बेरोजगारों को रोजगार मिलता और सबको बेरोजगारी भत्ता देने को भी पैसा बच जाता! चुनाव में निर्वाचन आयोग से पूछो कितना खर्च होता है या फिर चुनाव लड़ने वालों से पूछो कितने खोके खर्च करके चुनाव हारा या जीता!

जितना पैसा निर्वाचन की गेंदरिंग में नेता खर्च किया करते हैं और सरकारी मशीनरी दौड़ती है पूरा खर्च जोड़ लिया जाए तो देश में हर इंसान घर बैठे भत्ता पा सकता है!

लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि इस देश में राजनीतिक दलों ने ऐसा बीज बोया है जैसे गठिया घास का बीज खेत से निकलता नहीं! घर घर फूट पड़ गई है इसका कारण क्या है ? राजनीतिक दल ओर उनमें पनप रही गुटबाजी (धड़ेबाजी) इससे समाज में गंभीर प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है!

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देखने को मिलता है आज हर दल में गुटबाजी चरम पर चल रही है! वर्तमान विधायक काम कर रहा है तो भावी दावेदार बनकर को जगह भाजपा का चोला पहनकर कुछ तथाकथित नेता लोग संगठन को लेकर मंडल के वार्ड घूम रहे हैं विधायक को पता तक नहीं आने वाले दावेदार बनकर अभी से जन समस्या सुन रहे हैं ! यही नहीं मुख्यमंत्री को तक समस्या के लिए ज्ञापन दे रहे हैं जो गुटबाजी का प्रमाण सत्ताधारी दल में देखने को मिल रहा है! यह भाजपा के अनुशासन को तोड़ने वाला प्रतीत होता है! जब वर्तमान विधायक हैं तो फिर संगठन भावी विधायक कहने वाले नेता जी को लेकर दरबार लगा रहा है! ऐसा लगता है भाजपा के दो विधायक घूम रहे हैं! ये लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है!

वैसे तो भाजपा और कांग्रेस नेता एक दूसरे की टांग खींच रहे हैं! कांग्रेस अपना ढांचा खड़ा नहीं कर सकी है तो चुनाव कैसे जीतेगी विधानसभा ?

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी सरकार ने चार साल में संगठन और सत्ता में तालमेल पर जोर दिया लेकिन कुछ विधानसभाओं में विपरीत नजर आ रहा है ! संगठन और सत्ता में दूरी नजर आती है। लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में एक मंडल इसका जीता जागता उदाहरण है।

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